PoJK Violence: श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में शुक्रवार को नमाज के दौरान हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक (Mirwaiz Umar Farooq) ने पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी अशांति और हिंसक घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार पिछले डेढ़ महीने में जो कुछ हुआ है, उसने सभी को झकझोर कर रख दिया है।
मीरवाइज उमर फारूक (Photo:X/@MirwaizKashmir)
मीरवाइज ने अपने संबोधन में कहा कि रावलकोट सहित विभिन्न इलाकों से नागरिकों की मौत की खबरें बेहद दर्दनाक हैं। चाहे जान किसी आम नागरिक की गई हो या पुलिसकर्मी की, यह क्षति अपूरणीय है। उन्होंने मांग की कि मौतों के सही आंकड़ों का पता लगाने के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। मीरवाइज ने जोर देकर कहा कि शासन चाहे कोई भी चला रहा हो, लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोग ही अपनी जमीन के असली हितधारक हैं।
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बातचीत का अपनाएं रास्ता
सीमाएं भले ही खींची गई हों, लेकिन इतिहास, संस्कृति और पारिवारिक रिश्ते दोनों तरफ के लोगों को एक साथ जोड़ते हैं। उन्होंने पाकिस्तान सरकार और PoJK के स्थानीय प्रशासन से अपील की कि वे बल प्रयोग करने के बजाय 'संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) और आम जनता के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का रास्ता अपनाएं। टिकाऊ शांति केवल संवैधानिक न्याय और लोगों के अधिकारों के सम्मान से ही आ सकती है।
कश्मीरी शरणार्थियों के राजनीतिक अधिकारों का उठाा मुद्दा
इसके अलावा, मीरवाइज ने पाकिस्तान में रह रहे लाखों कश्मीरी शरणार्थियों के राजनीतिक अधिकारों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने 12 शरणार्थी सीटों को खत्म करने या उनके संवैधानिक दर्जे से छेड़छाड़ करने की कोशिशों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन शरणार्थियों के अधिकार पूरी कश्मीर घाटी के सामूहिक अधिकारों का हिस्सा हैं और इनके साथ कोई राजनीतिक सौदेबाजी नहीं होनी चाहिए।
