भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने देश की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत पाकिस्तान में सक्रिय 23 खूंखार आतंकियों को 'आतंकवादी' घोषित कर दिया है। ये सभी आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और अन्य प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं। इस नई सूची के जारी होने के बाद अब भारत सरकार द्वारा UAPA के तहत नामित कुल आतंकवादियों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है।
गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान में बैठे 23 आतंकियों को UAPA के तहत घोषित किया 'व्यक्तिगत आतंकवादी' (फाइल फोटो- PTI)
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हाफिज सईद और मसूद अजहर के करीबी निशाने पर
अमित शाह के मंत्रालय की इस नई सूची में सीमा पार से भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले मास्टरमाइंड्स के सबसे करीबी मददगारों को निशाना बनाया गया है। इसमें जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के बेहद करीबी सहयोगी और लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद और उसके शीर्ष कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी के खास सिपहसालार शामिल हैं।
हाफिज सईद का खास गुर्गा 'अब्दुल रऊफ'
गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, इस सूची में लश्कर प्रमुख हाफिज सईद के सबसे भरोसेमंद और करीबी सहयोगी अब्दुल रऊफ (उम्र लगभग 52 वर्ष, निवासी: कमरा नंबर 7, 4 लेक रोड, चौबुर्जी, लाहौर, पाकिस्तान) का नाम प्रमुखता से शामिल है। सरकारी आदेश के मुताबिक, अब्दुल रऊफ को UAPA कानून की चौथी अनुसूची में क्रम संख्या 69 पर आतंकवादी के रूप में दर्ज किया गया है।
क्यों लिया गया यह एक्शन?
आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रऊफ सीधे तौर पर लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ है। वह भारत में बड़े आतंकी हमलों की योजना बनाने, आतंकियों के बीच समन्वय स्थापित करने और टेरर फंडिंग में मुख्य रूप से शामिल रहा है। वह हाफिज सईद के सीधे आदेशों पर काम करता है।
UAPA कानून की धारा 35 का हुआ इस्तेमाल
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि UAPA अधिनियम, 1967 की धारा 35 की उप-धारा (1) के खंड (अ) और उप-धारा (2) के तहत केंद्र सरकार को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि उसे विश्वास हो कि कोई व्यक्ति आतंकवाद में संलिप्त है, तो वह उसका नाम कानून की चौथी अनुसूची में शामिल कर उसे 'आतंकवादी' घोषित कर सकती है।
पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर भारत के खिलाफ छद्म युद्ध छेड़ने वाले आतंकियों के खिलाफ यह मोदी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव और बढ़ेगा, साथ ही इन आतंकियों से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने में भी मदद मिलेगी।
