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क्या है विकसित भारत-जी राम जी विधेयक? जो लेगा मनरेगा की जगह; इससे क्या क्या बदलेगा, जानें पूरी ABCD

केंद्र सरकार मनरेगा को खत्म कर उसकी जगह एक नया कानून लाने की तैयारी में है। इसे विकसित भारत जी राम जी विधेयक 2025 नाम दिया गया है। वहीं, आज भारी हंगामे के बीच इसे लोकसभा से पारित भी करा लिया गया। आइये जानते हैं इस विधेयक को लाने के पीछे सरकार का उद्देश्य क्या है? अगर यह कानून बना तो क्या क्या बदल जाएगा? जी राम जी विधेयक मनरेगा से कैसे अलग है...

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विकसित भारत जी राम जी से क्या बदलेगा। फोटो-टाइम्स नाउ नवभारत
Authored by: शिव शुक्ला
Updated Dec 18, 2025, 14:05 IST
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Viksit Bharat G Ram G Bill 2025: केंद्र की मोदी सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को खत्म करने वाली है, इसकी जगह एक नया कानून लाया जाएगा। इसका नाम विकिसित भारत 'विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ (विकसित भारत- जी राम जी) विधेयक, 2025 रखा गया है। जारी शीतकालीन सत्र में इस विधेयक को लोकसभा से पारित भी करा लिया है। वहीं विपक्ष इसका जोरदार विरोध कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह कदम महात्मा गांधी का अपमान है। इतना ही नहीं उसका यह भी कहना है कि सरकार इसके जरिए राज्यों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाना चाहती है। आइये जानते हैं इस विधेयक को लाने के पीछे सरकार का उद्देश्य क्या है? अगर यह कानून बना तो क्या क्या बदल जाएगा? जी राम जी विधेयक मनरेगा से कैसे अलग है...

इस विधेयक को लाने के पीछे सरकार का क्या तर्क है?

विधेयक को लेकर ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह का कहना है कि मनरेगा ने पिछले 20 साल से अधिक समय तक ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी दी है। हालांकि, सामाजिक सुरक्षा के बड़े पैमाने पर कवरेज और बड़ी सरकारी योजनाओं को पूरी तरह लागू करने से ग्रामीण इलाकों में जो बड़ा सामाजिक-आर्थिक बदलाव आया है, उसे देखते हुए इसे और मजबूत करना जरूरी हो गया है। |

विकसित भारत- जी राम जी विधेयक लाने का उद्देश्य क्या है?

‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) को निरस्त करने और इस संबंध में एक नया कानून बनाने के पीछे का उद्देश्य भी नए विधेयक में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इसका उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित किया जाए। जिससे सशक्तीकरण एवं विकास को बढ़ावा देकर समृद्ध और सक्षम ग्रामीण भारत का निर्माण हो सके। सरकार का कहना है कि मनरेगा में जहां आजीविका सुरक्षा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित था, वहीं नये विधेयक में कहा गया है कि इसका मकसद समृद्ध और लचीले ग्रामीण भारत के लिए सशक्तीकरण, विकास, तालमेल को बढ़ावा देना है। विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक पर जोर देना है। विधेयक के अनुसार, खेतिहर मजदूरों की उपलब्धता को आसान बनाना जरूरी है।

विधेयक कानून बना तो क्या बदलेगा?

अगर लोकसभा और फिर राज्यसभा से पास होने के बाद विधेयक कानून बन गया तो हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को हर वित्त वर्ष में 125 दिन के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी। इसका लक्ष्य सशक्तीकरण एवं विकास को बढ़ावा देकर समृद्ध और सक्षम ग्रामीण भारत का निर्माण करना है। इसके अलावा, इसमें एक जो सबसे बड़ा प्रावधान किया गया है वो मजदूरी को फंड करने के पैटर्न में बदलाव करना है। दरअसल, अभी मनरेगा के तहत दी जाने वाली मजदूरी की पूरी लागत को केंद्र सरकार ही फंड करती है। इसके अलावा, मनरेगा के तहत होने वाले काम में लगने वाली सामग्री का 75 फीसदी हिस्सा भी केंद्र वहन करता है, लेकिन नए विधेयक में इस पैटर्न में बदलाव होगा। विकसित भारत- जी राम जी विधेयक में योजना के खर्च में 60-40 का रेशियो रखा जाएगा। तात्पर्य यह कि कानून बनने के बाद 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकारों को योजना का खर्च उठाना होगा। इससे एक ओर जहां केंद्र पर से वित्तीय दबाव थोड़ा कम होगा वहीं, राज्य सरकारों पर यह बोझ बढ़ जाएगा।

मनरेगा में क्या था?

अब बात महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) की कर लें, इसे साल 2005 में पूरे देश में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवार के काम करने में सक्षम 18 वर्ष की आयु वाले हर उस व्यक्ति को जो बिना कौशल वाला काम करने के लिए राजी हो, उसे साल के 100 दिन काम की गारंटी देना है। 12 दिसंबर को मनरेगा का नाम बदले जाने की भी खबर आई थी, हालांकि सरकार द्वारा इस संबंध में कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं की गई।

विकसित भारत जी राम जी विधेयक।

विकसित भारत जी राम जी विधेयक।

मनरेगा के तहत अगर काम नहीं मिला तो...

मनरेगा के तहत, सड़क निर्माण, तालाब, नहर, खेतों की मेड़, जल संरक्षण जैसे काम कराए जाते हैं। मनरेगा के तहत काम देना, सरकार की कानूनी जिम्मेदारी बना दी गई थी, वहीं, कामगारों को मजदूरी सीधे उनके बैंक खाते में दी जाती है। इतना ही नहीं, मनरेगा के तहत काम के आवेदन करने और जॉब कार्ड बन जाने के बाद अगर 15 दिन में काम नहीं मिलता है, तो सरकार द्वारा बेरोजगारी भत्ता दिए जाने का भी प्रावधान है। वहीं, मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी का भी ध्यान रखा गया है, मनरेगा के तहत होने वाले कार्य के लिए मजदूरों की संख्या में एक तिहाई संख्या महिलाओं की होनी चाहिए। इसके तहत 220 रुपये मजदूरी दी जाती है।

नए विधेयक से जुड़ी कुछ और बातें भी जान लें

  • संसद और फिर राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी के बाद यह कानून लागू होगा।
  • नया कानून आने के बाद मनरेगा को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। नया कानून आने के बाद केवल विकसित भारत-जी राम जी ही लागू रहेगा।
  • कानून लागू होने के बाद छह महीनों के भीतर राज्यों को अपनी नई योजना बनानी होगी
  • राज्यों को इस बाबत नया पंजीकरण व्यवस्था लागू करनी होगी, यह पूरी तरह डिजिटल और बायोमीट्रिक पर आधारित होगी।
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