Maratha Reservation: महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय के पात्र व्यक्तियों को कुनबी, मराठा-कुनबी या कुनबी-मराठा जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने की प्रक्रिया निर्धारित करते हुए एक नया सरकारी आदेश (GR) जारी किया है। इस निर्णय से मराठा समुदाय को जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया में राहत मिलेगी और नियमों में स्पष्टता आएगी
महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय को आरक्षण देने का फैसला किया।(फोटो साभार: पीटीआई)
मराठवाड़ा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मराठवाड़ा क्षेत्र की ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत काफी समृद्ध रही है। सातवाहन, वाकाटक, चालुक्य, यादव आदि राजवंशों ने इस क्षेत्र पर शासन किया
17 सितंबर, 1948 को इसका भारत में विलय हो गया और 1 मई, 1960 से यह महाराष्ट्र का हिस्सा बन गया..निजाम सरकार के दौरान, यहां की कुनबी जाति को 'कापू' कहा जाता था और उनका मुख्य व्यवसाय कृषि था।
सरकारी प्रक्रिया और समितियों की भूमिका सरकार ने पूर्व न्यायाधीश संदीप शिंदे की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी..जिसे हैदराबाद गजेटियर सहित विभिन्न ऐतिहासिक दस्तावेजों की जांच करके मराठवाड़ा में कुनबी समुदाय का रिकॉर्ड खोजने का काम सौंपा गया था।
समिति ने हैदराबाद, दिल्ली समेत कई जगहों से 7000 से ज़्यादा दस्तावेज़ एकत्र किए..इन दस्तावेज़ों की जाँच के आधार पर सरकार ने नियमों में संशोधन किया है ताकि मराठा समाज के पात्र लोगों को सही प्रमाण पत्र मिल सके
ग्राम स्तरीय समिति का गठन
सरकारी निर्णय के अनुसार, ग्राम स्तर पर तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
- ग्राम राजस्व अधिकारी
- ग्राम पंचायत अधिकारी
- सहायक कृषि अधिकारी
यह समिति स्थानीय स्तर पर जांच करेगी, जिन भूस्वामियों या भूमिहीन व्यक्तियों के पास भूमि अभिलेख नहीं हैं, वे एक शपथ पत्र दे सकते हैं, जिसमें 13.10.1967 से पहले संबंधित क्षेत्र में निवास का उल्लेख हो
समिति की जांच के बाद प्रमाणित रिपोर्ट के आधार पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाएगासिर्फ मेरी मां का अपमान नहीं यह देश की मां बहन बेटी का अपमान है। ये अपमान बिहार के सभी माताओं का अपमान है। बिहार में जो कुछ दिन पहले हुआ मैंन कभी कल्पना तक नहीं की था।
