'हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी ख़ामोशी...'; जब कम बोलने वाला प्रधानमंत्री देश में छोड़ गया अमिट छाप

Manmohan Singh Death Anniversary: देश के सबसे ताकतवर पद पर रहे मनमोहन सिंह भारतीय राजनीति की वे शख्सियत थे, जो बहुत कम बोलते थे। वे जितना खामोश रहते थे, उनकी खामोशी ही सबकुछ बोलती थी। अपनी जिंदगी में इसी तरह का खामोश अफसाना लिखने वाले मनमोहन सिंह 26 दिसंबर 2024 को दुनिया को अलविदा कह गए।

Manmohan Singh Death Anniversary: 'हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रखी।' देश के सबसे ताकतवर पद पर रहे मनमोहन सिंह के यह शब्द उन हजारों सवालों का जवाब था, जो उस समय विपक्ष में बैठने वाली भाजपा और दूसरे विरोधी दल उनकी चुप्पी पर उठाया करते थे।

Manmohan Singh

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (फोटो साभार: https://www.facebook.com/dr.manmohansingh)

पूर्व PM का कैसा रहा था सफर

26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब में मनमोहन सिंह का जन्म हुआ था। देश के वित्त मंत्री बनने से पहले वे न तो राजनीति में रहे और न राजनीति से उनका कोई खास नाता था। हालात की मजबूरियों ने ही उन्हें पहले वित्त मंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनाया। वे एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने कभी लोकसभा चुनाव नहीं जीता। वे राज्यसभा के जरिए चुनकर आते रहे और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठकर देश को चलाया। प्रधानमंत्री के तौर पर 10 साल के कार्यकाल में मनमोहन सिंह ने बहुत कुछ देखा। देश को विकास की राह पर चलते देखा और अपनी ही सरकार को भ्रष्टाचार की गर्त में डूबते हुए भी देखा।

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