पांच प्वाइंट्स में समझें क्यों जल उठा मणिपुर, क्या है मेती समाज का मुद्दा

  • Authored by: ललित राय
  • Updated May 5, 2023, 07:46 AM IST

Manipur Violence: मणिपुर आखिर क्यों जल उठा क्या सिर्फ मेती समाज का ही मुद्दा है और वजह कुछ और है। मेती समुदाय के मुद्दे पर मणिपुर हाईकोर्ट ने 19 अप्रैल को फैसला दिया था। उस फैसले के खिलाफ एकजुटता मार्च का आयोजन हुआ जिसका असर हिंसा के रूप में देखा जा रहा है।

Manipur Violence: मणिपुर की पहचान मैरीकॉम, लोकटक झील और उसकी खूबसूरती से है लेकिन उस खूबसूरती पर हिंसा(why violence in manipur) ने ग्रहण लगा दिया। सवाल यह है कि आखिर वो कौन सी वजह रही जिसके बाद हिंसा में मणिपुर झुलस गया। इतिहास बहुत पुराना है, लेकिन मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश को अमल में लाने की जब कोशिश हुई तो एक समाज दूसरे समुदाय के खिलाफ आ गया। मसला मेती समाज(Meitei people) से जुड़े लोगों को एसटी दर्जे से संबंधित है, मेती समाज की दशकों से शिकायत और मांग दोनों रही कि जब 1949 में उन्हें एसटी सूची में डाला गया तो 1950 में बाहर क्यों किया गया।

Manipur Violence, Meitei People

हिंसा में झुलसा मणिपुर

क्यों जल उठा मणिपुर

  • हिंसा की शुरुआत( Manipur violence in Hindi) पहले चूड़ाचांदपुर जिले से हुई। मामला कुछ यूं था, 19 अप्रैल को मणिपुर हाईकोर्ट ने मेती समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का फैसला सुनाया। इसके खिलाफ एकजुटता मार्च का आयोजन किया गया था।
  • मणिपुर की वास्तिवक समस्या मानवाधिकारों के उल्लंघन से रही है, 1960 से ही इस विषय पर आंदोलन होते रहे हैं। इसमें हिंसा का पुट तब आया जब उग्रवादी संगठनों ने छोटे छोटे बच्चों को हथियारों की ट्रेनिंग देकर भारत सरकार के खिलाफ भड़काया। मणिपुर में उग्रवाद की समस्या के पीछे बड़ी वजह यह भी रही कि वहां के लोगों को लगता था कि जबरदस्ती उन्हें भारतीय संघ में शामिल किया गया और राज्य का दर्जा दिए जाने में देरी की गई।
  • मणिपुर में गरीबी, बेरोजगारी, जनसंख्या विस्फोट, जातीय तनाव, बाहर रहने की इच्छा, युवाओं में असंतोष, हिंसा, भ्रष्टाचार और जेंडर इश्यू प्रमुख हैं।
  • आदिवासी समाज दो वजहों से मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश का विरोध कर रहे हैं। पहला , जनसंख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व दोनों में मेती समाज का दबदबा है, दूसरा, मेती लोगों की मणिपुरी भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है।
  • मेती समुदाय को वो वर्ग जो मुख्य रूप से हिंदू हैं, पहले से ही अनुसूचित जाति (SC) या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के तहत आते हैं और उसका फायदा भी उन्हें मिला है।

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