पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर उनकी पार्टी के विधायकों और सांसदों को डराने-धमकाने, पैसों का लालच देने और पुलिस बल का दुरुपयोग करके तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
ममता बनर्जी ने बीजेपी पर लगाया टीएमसी तोड़ने का आरोप। ANI
ममता बनर्जी ने लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी के कम से कम चार विधायक उनके पास यह शिकायत लेकर आए हैं कि पुलिस उन पर दबाव बना रही है।
टीएमसी नेताओं को धमका रही पुलिस: ममता बनर्जी
पुलिस द्वारा विधायकों को धमकी दी जा रही है कि यदि वे टीएमसी की बैठकों में शामिल हुए, तो उन्हें आर्म्स एक्ट (हथियार कानून) के तहत गिरफ्तार कर लिया जाएगा या गांजे (मादक पदार्थों) से जुड़े किसी झूठे मामले में फंसा दिया जाएगा।
उन्होंने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य में ज़ुल्म की सारी हदें पार हो चुकी हैं और पुलिस साफ तौर पर टीएमसी नेताओं को बता रही है कि उन्हें बीजेपी के किन नेताओं से संपर्क करना है, जिसके तुरंत बाद उन तृणमूल विधायकों को सीधे बीजेपी के पार्टी दफ्तर से फोन आने लगते हैं।
टीएमसी ने दो बागी विधायकों को किया निष्कासित
बता दें कि टीएमसी ने रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। दोनों ने कथित तौर पर शिकायत की कि उनके हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल हुआ है। वहीं, निष्कासित नेता संदीपान साहा ने इस मामले में ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि विधायकों की सूची पर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने ही हस्ताक्षर किए थे।
ममता बनर्जी ने अपनी ही पार्टी के कुछ बागी नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें 'गद्दार' करार दिया है। बिना नाम लिए रीतब्रत पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह एक पूरी तरह से सिद्धांतहीन आदमी हैं, जिसे सीपीएम ने पहले ही अपनी पार्टी से निकाल दिया था और कम से कम इस एक मामले में वे सीपीएम की तारीफ करती हैं।
ममता बनर्जी ने अफसोस जताते हुए कहा कि उस नेता ने टिकट के लिए उनके सामने घुटनों के बल बैठकर भीख मांगी थी, जिसके बाद उन्होंने हावड़ा में एक दूसरे उम्मीदवार का टिकट काटकर उसे जगह दी और उसे एमपी तथा एमएलए दोनों बनाया; अपने उस पुराने फैसले के लिए वे आज जनता से विनम्रतापूर्वक माफी मांगती हैं। उन्होंने उन नेताओं के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया जो यह बहाना बनाकर पार्टी छोड़ रहे हैं कि उन्हें नेतृत्व से बातचीत के अवसर नहीं मिलते।
ममता बनर्जी ने साफ किया कि वे कालीघाट स्थित अपने आवास पर नियमित रूप से लोगों से मिलती हैं और वे खुद तथा अस्वस्थ होने से पहले अभिषेक बनर्जी रोजाना पार्टी दफ्तर बैठकर लोगों के दस्तावेजों, शिकायतों और मुद्दों की समीक्षा करते थे और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता भी देते थे। ऐसे में बातचीत का मौका न मिलने का दावा करने वाले लोग असल में सिर्फ भागने का बहाना ढूंढ रहे हैं क्योंकि वे हमेशा सत्ता के साथ बने रहना चाहते हैं।
टीएमसी के बागी नेताओं पर ममता बनर्जी ने साधा निशाना
ममता बनर्जी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज केवल कुछ नेता डरे हुए हैं, पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता नहीं। ये नेता टीएमसी के टिकट पर ही चुनाव जीतकर विधायक और सांसद बने और सत्ता के सारे सुख भोगे, लेकिन आज जैसे ही पार्टी को राजनीतिक चुनौतियों या हार का सामना करना पड़ा, वे दूसरी पार्टियों के साथ 'समझौते' करने में जुट गए।
कुछ नेता अपनी अकूत संपत्ति बचाने के लिए तो कुछ पुलिस की धमकियों और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पाला बदल रहे हैं। उन्होंने ऐसे नेताओं को आईना दिखाते हुए पूछा कि अगर वे डर रहे हैं, तो उन हजारों आम पार्टी कार्यकर्ताओं का क्या होगा जिन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और जिन्होंने इन्हीं नेताओं को जिताने के लिए दिन-रात मेहनत की थी।
'टीएमसी को खत्म करना आसान नहीं'
उन्होंने अपने परिवार के सदस्य अभिषेक बनर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय उनकी जान जोखिम में थी और उनके साथ लिंचिंग जैसी घटना होने वाली थी, लेकिन उस नौजवान ने हार मानने या सिर झुकाने के बजाय डटकर मुकाबला किया; इसी तरह शारीरिक हमले का शिकार होने के बावजूद कल्याण बनर्जी भी लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
ममता बनर्जी ने चुनौती भरे लहजे में साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस को खत्म करना कोई आसान काम नहीं है क्योंकि पार्टी की असली ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने विरोधियों और पाला बदलने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग पैसे के लालच या डर के मारे तृणमूल को अस्थिर करने की साजिश रच रहे हैं, वे याद रखें कि वे खुद राजनीति की एक बहुत मजबूत खिलाड़ी हैं और इस खेल का अंजाम देखने के लिए उन्हें बस थोड़ा इंतजार करना होगा।
