नई दिल्ली/जम्मू: नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तान की बढ़ती गतिविधियों और चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच भारतीय सेना की उत्तरी कमान को नया नेतृत्व मिल गया है। लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने गुरुवार, 1 मई को उत्तरी सेना के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने यह जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट जनरल एम.वी. सुचिंद्र कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद संभाली।
लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने संभाली उत्तरी सेना की कमान
सुरक्षा के मोर्चे पर सबसे संवेदनशील कमान
उत्तरी कमान भारतीय सेना की सबसे अहम और संवेदनशील कमान मानी जाती है, क्योंकि यही कमान जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्रों में पाकिस्तान और चीन दोनों सीमाओं की निगरानी करती है। इसके अंतर्गत नियंत्रण रेखा पर चल रही घुसपैठ रोधी कार्रवाई (Counter-infiltration), आतंकवाद विरोधी अभियान (Counter-terrorism), और उच्च पर्वतीय सीमा क्षेत्रों में तैनाती शामिल है। इसी क्षेत्र में सियाचिन ग्लेशियर भी आता है।
लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा इससे पहले सेना मुख्यालय में डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (स्ट्रैटेजी) के रूप में कार्यरत थे, जहाँ उन्होंने सेना की संचालन, खुफिया और रणनीति से जुड़ी निदेशालयों का नेतृत्व किया। वे सेना के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) भी रह चुके हैं — यह वह पद है जो पूरे देश की सैन्य कार्रवाई और योजना का संचालन करता है।
पहलगाम हमले के बाद से कश्मीर में सक्रिय
पिछले वर्ष कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा लगातार घाटी में सक्रिय रहे। वे सुरक्षा योजनाओं, ऑपरेशनल ब्रीफिंग्स और काउंटर टेरर ऑपरेशनों का हिस्सा रहे हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब सीमा पर तनाव चरम पर है और सेना को रणनीतिक नेतृत्व की जरूरत है।
ऑपरेशनल अनुभव का लंबा रिकॉर्ड
उन्हें 1980 के दशक में श्रीलंका में इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (IPKF) के तहत ऑपरेशन पवन में सेवा देने का अनुभव है। वे ऑपरेशन मेघदूत (सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जा बनाए रखने की भारतीय सेना की कार्रवाई), ऑपरेशन रक्षक (जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान), और ऑपरेशन पराक्रम (2001-02 भारत-पाक सीमा पर सैन्य जमावड़ा) में भी सक्रिय रहे हैं।
उन्होंने अंबाला स्थित 2 कोर (खड़गा कोर) की कमान भी संभाली है, जिसे पाकिस्तान सीमा पर स्ट्राइक फोर्स के तौर पर तैनात किया जाता है। साथ ही, उन्होंने पूंछ सेक्टर में एक डिवीजन की कमान भी संभाली है, जो अक्सर आतंकी घुसपैठ का केंद्र बनता है।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान की ओर से LoC पर फिर से गोलाबारी और घुसपैठ की कोशिशें तेज हो गई हैं। वहीं, चीन के साथ LAC (Line of Actual Control) पर भी कई क्षेत्रों में गतिरोध अब भी कायम है। ऐसे में प्रतीक शर्मा जैसे अनुभवी और ज़मीनी समझ रखने वाले अधिकारी की मौजूदगी से उत्तरी कमान को नई रणनीतिक दिशा मिल सकती है।
