Land for Job Scam: रेलवे में नौकरी के बदले जमीन से जुड़े धनशोधन मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोपों पर नए सिरे से दलीलें सुनी जाएंगी।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता लालू प्रसाद यादव (फाइल फोटो)
स्पेशल जज प्रशांत कुमार ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नए सिरे से दलीलें पेश करने के लिए समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को तय की।
अदालत ने कहा कि ईडी के वकील आरोप तय किए जाने के बिंदु पर नए सिरे से दलीलें पेश करने के लिए कुछ समय चाहते हैं। इससे पहले, स्पेशल जज विशाल गोगने ने आरोप तय करने के मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। ईडी ने इस संबंध में अपनी दलीलें इस साल 16 मार्च को पूरी कर ली थीं।
स्पेशल जज का हो गया ट्रांसफर
बाद में स्पेशल जज गोगने का द्वारका कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। बुधवार को कोर्ट के कर्मचारियों ने भी इसकी जानकारी दी। दिल्ली हाई कोर्ट की ऑनलाइन सूचना प्रणाली के मुताबिक, जज गोगने 22 सितंबर से रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं।
CBI की शिकायत से जुड़ा है मनी लॉन्ड्रिंग केस
यह मामला धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत दर्ज किया गया है और मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई शिकायत पर आधारित है। इसी मामले से जुड़े सीबीआई केस में स्पेशल जज गोगने ने 9 जनवरी को लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों समेत 41 आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप तय करने का आदेश दिया था।
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मामला उस अवधि से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री थे। ईडी ने अपनी पहली चार्जशीट में पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी, बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव, यादव परिवार के कथित करीबी सहयोगी अमित कात्याल, पूर्व रेलवे कर्मचारी हृदयानंद चौधरी और दो कंपनियों AK Infosystems Pvt Ltd तथा AB Exports Pvt Ltd को आरोपी बनाया था। इन दोनों कंपनियों के कॉमन डायरेक्टर शरीकुल बारी हैं।
