Valmiki Scam: कर्नाटक से बड़ी खबर सामने आ रही है। शिवकुमार सरकार में मंत्री बी. नागेंद्र ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अपना पद छोड़ दिया। इससे पहले, शिवकुमार से जब नागेंद्र के इस्तीफे से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्होंने उस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह खुद आकर आपसे बात करेंगे।
शिवकुमार सरकार में मंत्री बी. नागेंद्र ने दिया इस्तीफा (फोटो साभार: @BNagendraINC)
बी. नागेंद्र ने छोड़ा पद
कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि वह अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहा हूं, ताकि विपक्ष की ओर से मेरे खिलाफ लगाए जा रहे बेवजह के आरोपों के कारण मेरी पार्टी को किसी तरह की शर्मिंदगी न उठानी पड़े।''
नागेंद्र ने आरोप लगाया, ''मनुवादियों (भाजपा की ओर इशारा करते हुए) ने मुझे निशाना बनाया, क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि देश में कोई आदिवासी व्यक्ति तरक्की करे।'' नागेंद्र ने कहा कि वह विधायक पद से इस्तीफा देने और 'जनता की अदालत' में जाने के लिए भी तैयार हैं।
सिद्दारमैया मंत्रिमंडल से भी दे चुके हैं इस्तीफा
नागेंद्र ने वाल्मीकि निगम से बिना अनुमति के फ़ंड डायवर्जन के आरोपों के बीच जून 2024 में सिद्दारमैया मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। उन्हें इस साल 3 अगस्त को कैबिनेट में फिर से शामिल किया गया।
क्या है वाल्मीकि निगम मामला?
यह विवाद मई 2024 में उस वक्त सामने आया जब महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के तत्कालीन लेखा अधीक्षक पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने छह पन्नों के एक कथित सुसाइड नोट में निगम के पैसों में अनियमितताओं और बिना अनुमति धन ट्रांसफर किए जाने के आरोप लगाए थे।
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बाद की जांच में सामने आया कि निगम के एक खाते से 89.63 करोड़ रुपये यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। इसके बाद यह रकम कई अन्य खातों में भेजी गई। इस खुलासे के बाद मामला बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया।
जब यह विवाद सामने आया था, उस समय नागेंद्र कर्नाटक के जनजातीय कल्याण मंत्री थे। उन्होंने जून 2024 में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, 3 अगस्त 2026 को उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद विपक्ष ने एक बार फिर उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी।
