प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘कल्पसर परियोजना’ को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। नीदरलैंड के अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ नीदरलैंड की प्रसिद्ध जल प्रबंधन संरचना, ‘अफस्लुइटडिज्क’ (Afsluitdijk) का दौरा किया। उन्होंने इस बांध में इस्तेमाल की गई तकनीक को सीखने योग्य बताया।
कल्पसर परियोजना में नीदरलैंड करेगा तकनीकी सहयोग (Image: X)
बता दें कि‘अफस्लुइटडिज्क’ और गुजरात की कल्पसर परियोजना के बीच बहुत-सी समानताएं हैं। कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग के लिए प्रधानमंत्री की मौजूदगी में भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के बुनियादी ढांचा और जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इससे परियोजना का कार्य तेज रफ्तार से आगे बढ़ने के नए द्वार खुल गए हैं।
क्या है कल्पसर परियोजना
कल्पसर परियोजना के तहत खंभात की खाड़ी में विशाल बांध बनाकर समुद्र में गिरने वाली सात नदियों के पानी को संरक्षित करने की योजना है। इससे सिंचाई, पेयजल, परिवहन और ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना पूरी होने पर सौराष्ट्र के 9 जिलों की 42 तहसीलों को करीब 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।
इसके अलावा दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र के बीच दूरी 240 किलोमीटर से घटकर लगभग 60 किलोमीटर रह जाएगी। परियोजना से 1500 मेगावाट पवन ऊर्जा और 1000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन की भी संभावना जताई गई है।
वर्ष 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों से कल्पसर बांध की पथरेखा सुनिश्चित करने के लिए भावनगर में समुद्री सर्वेक्षण का ऐतिहासिक शुभारंभ किया गया। लेकिन, योजना के बेहद जटिल होने के कारण इसे साकार करने में कई प्रकार की मुश्किलें सामने आ रही हैं। इन मुश्किलों से निपटने के लिए सरकार की ओर से लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में, 30 मार्च, 2026 को गांधीनगर में नीदरलैंड की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कल्पसर योजना को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की और ‘इंडो-डच’ विशेषज्ञ समूह के गठन और जी2जी भागीदारी के बारे में चर्चा की।
क्या है अफस्लुइटडिज्क?
नीदरलैंड का विश्व प्रसिद्ध जल प्रबंधन परियोजना ‘अफस्लुइटडिज्क’ का दौरा किया। यह 32 किलोमीटर लंबा बैरियर डैम उत्तरी सागर के खारे पानी को रोककर मीठे पानी का विशाल जलाशय तैयार करता है और बाढ़ नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी तकनीक गुजरात की कल्पसर परियोजना के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
