Leh Protest: बीते 24 सितंबर को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शन की न्यायिक जांच होगी। गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। इस न्यायिक जांच समिति की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बीएस चौहान करेंगे। लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों की वजह से कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर हो गई थी। पुलिस के साथ हिंसक झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की उकसावे पर लोग हिंसक हुए। लोगों को उकसाने के आरोप में वांगचुक को गिरफ्तार किया गया। वांगचुक न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।
लेह में बीते 24 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शन। तस्वीर-PTI
हिंसा के मामले में छह नेता रिहा
इससे पिछले महीने यहां हुई हिंसा के मामले में तीन सप्ताह की हिरासत के बाद कांग्रेस के एक पार्षद सहित छह नेताओं को बुधवार को जमानत पर रिहा किया गया। इसी से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने हिंसा की घटना के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत 24 सितंबर को लागू की गई सभी पाबंदियों को हटाने का आदेश जारी किया। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।
स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था
अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय अदालत द्वारा जिन नेताओं को जमानत दी गयी उनमें ऊपरी लेह से कांग्रेस पार्षद स्टैनजिन फुंटसोग त्सेपाक, लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन (एलबीए) की महिला शाखा की अध्यक्ष कुन्जेस डोलमा, अंजुमन मोइन-उल-इस्लाम के इरफान बारी और लेह एपेक्स बॉडी से पद्मा स्टैनज़िन, जिग्मेट पलजोर और स्टैनज़िन चोस्पेल शामिल हैं। वे (जमानत पर रिहा सभी नेता) उन कई युवा नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने व्यापक हिंसा में कथित रूप से शामिल प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था।
70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया
पुलिस ने 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया और उनमें से 35 को पिछले सप्ताह जमानत पर रिहा कर दिया गया। कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के साथ मिलकर लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) सोनम वांगचुक सहित हिरासत में लिए गए सभी लोगों की रिहाई, न्यायिक जांच और चार मृत व्यक्तियों तथा गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग कर रही है ताकि केंद्र के साथ रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू किया जा सके। अपने आदेश में जिला मजिस्ट्रेट ने जिले में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से हटाने की घोषणा की।
