Jhiram Ghati Attack: झीरम घाटी नक्सली हमले के 13 साल बाद जगदलपुर स्थित विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए गिरफ्तार किए गए सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। 25 मई 2013 को हुए इस भीषण नरसंहार में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व समेत 32 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी।
झीरम घाटी कांड में सभी 10 आरोपी दोषी करार (फाइल फोटो- PTI)
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13 साल की लंबी जांच और कानूनी प्रक्रिया
झीरम घाटी कांड भारत के इतिहास के सबसे घातक नक्सली हमलों में से एक माना जाता है। इस घटना के बाद से ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और लंबी कानूनी लड़ाई का दौर जारी था। एनआईए ने मामले की जांच करते हुए कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा शुरू किया था।
ट्रायल के दौरान ही 1 आरोपी की मौत हो गई थी। अदालत ने अब बाकी बचे सभी 10 आरोपियों को दोषी पाया है। हालांकि, एनआईए द्वारा दाखिल चार्जशीट में शामिल 33 अन्य आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
क्या था झीरम घाटी कांड?
25 मई 2013 को बस्तर जिले की झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, बस्तर के दिग्गज नेता महेंद्र कर्मा (जिन्हें 'सलवा जुडूम' का सूत्रधार माना जाता था) और कई वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं व सुरक्षाकर्मियों समेत कुल 32 लोगों की जान चली गई थी।
अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के फैसले को पीड़िता परिवार और प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। दोषियों की सजा के ऐलान पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
