दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और धरने की जगह बदलने के फैसले को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना विस्तृत पक्ष रखा है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार की ओर से दाखिल दो अलग-अलग हलफनामों में राजधानी में प्रदर्शन की व्यवस्था, जंतर-मंतर को डिनोटिफाई करने की वजह, वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों की पहचान और दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में धारा 163 BNSS लागू करने के आधार का ब्योरा दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति या संगठन किसी एक निश्चित जगह पर हमेशा के लिए प्रदर्शन करने का अधिकार मांग सकता है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के अधिकार के साथ आम नागरिकों की सुरक्षा, कारोबार, आवाजाही, सरकारी कार्यालयों के कामकाज और आपातकालीन सेवाओं का अधिकार भी संतुलित करना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल स्वाति सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले के काउंटर एफिडेविट में पुलिस कमिश्नर ने जंतर-मंतर को स्थायी प्रदर्शन स्थल के रूप में डिनोटिफाई करने के फैसले का बचाव किया है। वहीं, M.A. Baby बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में दाखिल अतिरिक्त हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने राजधानी के 15 पुलिस जिलों और 72 सब-डिवीजन का ब्योरा देते हुए अलग-अलग इलाकों में धारा 163 BNSS के तहत जारी सात आदेश अदालत के रिकॉर्ड पर रखे हैं।
जंतर-मंतर पर सालाना 1300 से ज्यादा प्रदर्शन, क्षमता महज 1500 लोगों की
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जंतर-मंतर पर औसतन हर साल 1300 से ज्यादा प्रदर्शन, धरने और विरोध कार्यक्रम आयोजित होते हैं। पुलिस के आकलन के मुताबिक, इस जगह पर एक समय में अधिकतम करीब 1500 लोगों के प्रदर्शन करने की क्षमता है। पुलिस ने 20 जुलाई 2026 को हुए प्रदर्शन का विशेष रूप से जिक्र किया है। हलफनामे में कहा गया है कि उस दिन प्रदर्शनकारियों की संख्या निर्धारित क्षमता से अधिक हो गई थी। इसके बाद भीड़ आसपास के जनपथ और कनॉट प्लेस इलाके तक फैलने लगी।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जब किसी प्रदर्शन स्थल की क्षमता से ज्यादा लोग जुटते हैं तो वहां भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। इसका असर आसपास की सड़कों, बाजारों और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने वाले लोगों पर पड़ता है।
जंतर-मंतर के 3-4 किलोमीटर के दायरे में 78 विदेशी दूतावास
जंतर-मंतर को डिनोटिफाई करने के पीछे दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा से जुड़ी बड़ी वजहें भी गिनाई हैं। पुलिस कमिश्नर के हलफनामे के मुताबिक, जंतर-मंतर के करीब 3 से 4 किलोमीटर के दायरे में 78 विदेशी दूतावास, राजनयिक मिशन और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कार्यालय स्थित हैं।पुलिस का तर्क है कि जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन यदि बड़े हो जाते हैं या हिंसक रूप ले लेते हैं तो इसका असर इन विदेशी मिशनों के कामकाज और सुरक्षा पर पड़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
आसपास 99 केंद्रीय सरकारी कार्यालय, रोजाना 1.46 लाख लोगों की आवाजाही
दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में एक और महत्वपूर्ण आंकड़ा दिया है। पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर के 3 से 4 किलोमीटर के दायरे में केंद्र सरकार के 99 कार्यालय और संस्थान स्थित हैं। इनमें विभिन्न मंत्रालयों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जैसे संस्थानों का भी जिक्र किया गया है। इन कार्यालयों में प्रतिदिन करीब 1,46,040 लोगों की आवाजाही होती है।
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान ट्रैफिक जाम और भीड़ के कारण इन कार्यालयों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इससे सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ अपने काम के सिलसिले में इन कार्यालयों में आने वाले आम नागरिकों के अधिकार भी प्रभावित होते हैं।
7 हजार से ज्यादा निजी मकान, 5 हजार से ज्यादा सरकारी आवास भी आसपास
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के आसपास रहने वाली आबादी का भी आंकड़ा अदालत के सामने रखा है। हलफनामे के मुताबिक, जंतर-मंतर के करीब 3 से 4 किलोमीटर के दायरे में 7,017 निजी आवास हैं, जिनमें करीब 36,685 लोग रहते हैं। इसके अलावा 5,349 सरकारी आवासीय इकाइयां हैं, जिनमें करीब 27,881 लोग रहते हैं। पुलिस का कहना है कि लगातार होने वाले प्रदर्शनों के कारण इन इलाकों में रहने वाले लोगों को ट्रैफिक जाम, शोर-शराबे और आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
राम मनोहर लोहिया अस्पताल की एंबुलेंस तक प्रभावित होने का दावा
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के नजदीक स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल का भी विशेष रूप से उल्लेख किया है। हलफनामे में कहा गया है कि लगातार ट्रैफिक जाम और प्रदर्शनों के कारण अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों और एंबुलेंस की आवाजाही प्रभावित होती है। कई बार आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में भी बाधा आती है। पुलिस का तर्क है कि किसी भी प्रदर्शन स्थल की व्यवस्था तय करते समय सिर्फ प्रदर्शनकारियों की सुविधा नहीं, बल्कि आसपास के अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं की जरूरतों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।गृह मंत्रालय की समिति ने जंतर-मंतर के विकल्प सुझाए
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रखने की उपयुक्तता और वैकल्पिक स्थानों की पहचान के लिए एक समिति गठित की थी। समिति ने सितंबर 2026 में अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी। इसके बाद 14 सितंबर 2026 को रिपोर्ट दिल्ली पुलिस को भेजी गई। पुलिस के हलफनामे में कहा गया है कि समिति ने जंतर-मंतर रोड को मौजूदा परिस्थितियों में प्रदर्शन और धरने के लिए अनुपयुक्त माना। समिति ने सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा जैसे पहलुओं पर विचार किया था।समिति ने प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थानों की पहचान की है। रामलीला मैदान, CBD ग्राउंड और बुराड़ी ग्राउंड। पुलिस के मुताबिक, इन स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण विरोध के लिए जगह उपलब्ध कराने के साथ आम लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना ज्यादा व्यावहारिक होगा।
सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले का दिया हवाला
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के मामले में सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई 2018 के फैसले का भी हवाला दिया है। पुलिस के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने उस समय स्पष्ट किया था कि शांतिपूर्ण विरोध और असहमति का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मौलिक अधिकार है। हालांकि, किसी व्यक्ति या संगठन को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी एक खास स्थान पर ही प्रदर्शन करने की मांग करे। पुलिस ने दलील दी है कि सक्षम प्राधिकारी परिस्थितियों और जनहित को देखते हुए प्रदर्शन का स्थान बदल सकता है।
हलफनामे में यह भी बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर 2018 को स्टैंडिंग ऑर्डर जारी किया था, जिसमें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए दिशा-निर्देश तय किए गए थे। बाद में 28 अप्रैल 2022 को इस व्यवस्था को संशोधित किया गया।
जंतर-मंतर इलाके में 250 डिस्ट्रेस कॉल, 109 चोरी की FIR
दिल्ली पुलिस ने 1 अगस्त 2026 से 27 अगस्त 2026 के बीच जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में दर्ज शिकायतों और मामलों के आंकड़े भी पेश किए हैं। पुलिस के हलफनामे के मुताबिक:
- 250 डिस्ट्रेस कॉल दर्ज हुईं।
- चोरी के 109 FIR दर्ज किए गए।
- मोटर वाहन चोरी के 10 FIR दर्ज हुए।
- संपत्ति के नुकसान से जुड़े 254 दावों का उल्लेख किया गया।
- सार्वजनिक अव्यवस्था और दंगों से संबंधित 23 FIR दर्ज होने की बात कही गई।
- दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 91, 92, 93 और 97 के तहत सार्वजनिक उपद्रव से जुड़े 14 मामलों का उल्लेख किया गया।
पुलिस ने इन आंकड़ों को जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौतियों के संदर्भ में पेश किया है।
दिल्ली के 15 पुलिस जिले, 72 सब-डिवीजन में लागू किए गए धारा 163 के आदेश
दूसरे हलफनामे में पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने दिल्ली के पुलिस प्रशासन का ढांचा बताते हुए कहा है कि राजधानी में कुल 15 पुलिस जिले हैं और इन्हें 72 सब-डिवीजन में बांटा गया है।पुलिस ने बताया है कि नई दिल्ली जिला बेहद संवेदनशील है। इसमें जंतर-मंतर, संसद, राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट जैसे महत्वपूर्ण स्थान आते हैं। जुलाई में पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान सामने आई परिस्थितियों के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अलग-अलग इलाकों में BNSS की धारा 163 के तहत आदेश जारी किए गए। पुलिस का कहना है कि इन आदेशों का उद्देश्य ट्रैफिक बाधित होने, मानव जीवन को खतरा पहुंचने और सार्वजनिक शांति भंग होने जैसी परिस्थितियों को रोकना था।सुप्रीम कोर्ट में धारा 163 के तहत जारी सात आदेशों की कॉपी दाखिल
M.A. Baby मामले में दाखिल अतिरिक्त हलफनामे के साथ दिल्ली पुलिस ने सात अलग-अलग आदेशों को रिकॉर्ड पर रखा है। इनमें कनॉट प्लेस, टी रोड, पार्लियामेंट स्ट्रीट, चाणक्यपुरी, बाराखंभा रोड, सफदरजंग एन्क्लेव और डिफेंस कॉलोनी के आदेश शामिल हैं। पुलिस ने इन आदेशों की तारीख और नंबर भी हलफनामे में बताए हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि धारा 163 के तहत आदेश संबंधित क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और परिस्थितियों को देखते हुए जारी किए जाते हैं। पुलिस कमिश्नर ने अदालत से यह अनुमति भी मांगी है कि जरूरत पड़ने पर वह आगे विस्तृत हलफनामा दाखिल कर सकें।
दिल्ली पुलिस का बड़ा तर्क- प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन एक ही जगह पर कब्जे का अधिकार नहीं
दोनों हलफनामों में दिल्ली पुलिस का मुख्य तर्क यह है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ दूसरे नागरिकों के अधिकारों को भी सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है। पुलिस ने कहा है कि आम नागरिकों को अपने काम पर जाने, कारोबार करने, अस्पताल पहुंचने और राजधानी में स्वतंत्र रूप से आवाजाही करने का अधिकार है। किसी एक सार्वजनिक सड़क को हमेशा के लिए प्रदर्शन स्थल के रूप में आरक्षित नहीं किया जा सकता।स्वाति सिंह मामले में पुलिस कमिश्नर ने अदालत से कहा है कि जंतर-मंतर को डिनोटिफाई करने का फैसला प्रशासनिक और कार्यकारी निर्णय है, जिसे बदली हुई परिस्थितियों और व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर लिया गया है। इसलिए अदालत को इस फैसले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
