Jantar Mantar Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को एक और दौर की बात की। इस दौरान, सरकार ने सीजेपी प्रतिनिधियों की मांगों को स्वीकार कर लिया। इसके बाद, सीजेपी और सरकार ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, जहां सीजेपी के प्रतिनिधि आशुतोष रांका और सौरभ दास ने छात्र आंदोलन को वापस लेने का ऐलान किया और प्रदर्शनकारी छात्रों से अपील की कि शांतिपूर्ण ढंग से अपने घर वापस लौट जाएं।
सरकार-CJP की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस
छात्रों पर दर्ज FIR होगी रद्द
ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी के प्रतिनिधि ने कहा कि सरकार ने छात्रों पर दर्ज हुई एफआईआर को वापस लेने की बात मान ली है। 15 से 20 एफआईआर दर्ज हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा, उसकी लिस्ट सरकार हमें देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों और उनके सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में आंदोलन से जुड़े दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने पर सरकार सहमत हो गई है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां एफआईआर दर्ज हुई हैं, उनकी प्रतियां भी उन्हें उपलब्ध कराई जाएंगी।
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद कहा, "हम सभी प्रदर्शनकारियों से अपने-अपने घर लौटने का आग्रह करते हैं, क्योंकि सरकार ने हमारी मांगें मान ली हैं।"
ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोले आशुतोष रांका
आशुतोष रांका ने बताया कि हमने सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन दौर की वार्ता की। जंतर-मंतर पर चल रहे हमारे प्रोटेस्ट की तीन मुख्य मांगें थीं- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रोटेस्टर्स और ऑर्गेनाइजर्स के खिलाफ फाइल किए गए सभी लीगल केस और एफआईआर वापस ली जाए और भविष्य में भी उनपर कोई केस फाइल न किया जाए। हमारी तीसरी डिमांड थी कि नीट पेपर लीक के चलते जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उन्हें एक करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए। अभी कुछ वक्त पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है। इसका मतलब है कि पहली डिमांड मान ली गई है।
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'CJP के साथ लंबी वार्ता हुई'
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, ''आज हमारी लंबी बातचीत हुई। वे एक रिटेन ड्राफ्ट लाए थे जिसमें उन्होंने आंदोलन में चल रहे केस के बारे में चार प्वाइंट्स रखे थे। इसके साथ ही, हमने बाकी दो मांगों पर भी बात की: कोई बदले की कार्रवाई न की जाए, मुआवजा दिया जाए, और उनके पांच प्वाइंट वाले चार्टर पर विचार किया जाए। हम उन्हें एफआईआर की कॉपी देंगे, और कोई कार्रवाई नहीं होगी। दूसरी बात जो कही गई है, वह मुआवजे के बारे में है। इस पर सरकार ने साफ कहा है कि हमें भी सहानुभूति है। हम सभी ने कहा है कि नियम और कानून के हिसाब से ज्यादा से ज्यादा जो भी हो पाएगा वह मुआवजा दिया जाएगा।"
सनद रहे कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में प्रधान सार्वजनिक विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री हैं। उनसे पहले एमजे अकबर ने 2018 में विदेश राज्य मंत्री के पद से उस समय इस्तीफा दे दिया था, जब मीटू आंदोलन के दौरान उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।
