पश्चिम बंगाल की राजनीति में छाए हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उन पर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले स्थित आवास पर तैनात एक पुलिसकर्मी पर कथित तौर पर हमला करने का आरोप है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सोहेल के खिलाफ यह कार्रवाई कांस्टेबल जुम्मा खान की शिकायत पर की गई है। वहीं, राज्य में सत्तारूढ़ टीएमसी ने इस मामले को लेकर साफ किया है कि उसका इससे कोई लेना-देना नहीं है। हुमायूं कबीर के बेटे मे संज्ञेय अपराध किया था, जिसके आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
हुमायूं कबीर। तस्वीर-Facebook
क्या है पूरा मामला?
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भरतपुर से विधायक कबीर के निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) के रूप में तैनात जुम्मा खान ने रविवार सुबह छुट्टी के लिए आवेदन किया था। इस पर भरतपुर से विधायक के बेटे गुलाम नबी आजाद उर्फ सोहेल ने उनपर हमला कर दिया और मारपीट की। इसी मामले में जुम्मा खान ने शिकायत की थी, जिसके आधार पर सोहेल को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है और मामले की जांच जारी है। आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह राजनीतिक उत्पीड़न-हुमायूं कबीर
वहीं, विधायक हुमायूं कबीर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि घटना के समय वह घर पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे ने केवल घर में पुलिसकर्मी के प्रवेश पर आपत्ति जताई थी, जिसे गलत तरीके से मारपीट का रूप दे दिया गया। कबीर ने पुलिस पर तृणमूल कांग्रेस के इशारे पर कार्रवाई करने का आरोप लगाया। कबीर ने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि के आवास की कमजोर बहानों पर घेराबंदी नहीं की जा सकती। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक उत्पीड़न बताते हुए एक जनवरी को मुर्शिदाबाद में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के घेराव का ऐलान किया और अपने बेटे की तत्काल रिहाई की मांग की।
टीएमसी बोली-हमारा कोई लेना-देना नहीं
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि आरोपी ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पर हाथ उठाकर संज्ञेय अपराध किया, इसलिए पुलिस ने कानून के मुताबिक कदम उठाया है। पार्टी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने स्पष्ट किया कि इस पूरे घटनाक्रम से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।
गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस से निलंबन के बाद हुमायूं कबीर ने हाल ही में जनता उन्नयन पार्टी का गठन किया है। वह इससे पहले मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद की आधारशिला रखने को लेकर भी चर्चा में रहे थे।
