India Russia Ties: नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) के दौरान भारत और रूस के मजबूत रिश्तों की चर्चा के बीच देश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "आत्म-प्रचार" पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि भारत और रूस के बीच जो अटूट रणनीतिक रिश्ते आज दिखते हैं, उनकी मजबूत नींव 1950 के दशक में ही रख दी गई थी। यह रिश्ता किसी एक सरकार या व्यक्ति की देन नहीं, बल्कि दशकों की कूटनीतिक निरंतरता का परिणाम है।
BRICS के बीच भारत-रूस रिश्तों पर जयराम रमेश का मोदी सरकार पर हमला
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए भारत के विकास में पूर्ववर्ती सोवियत संघ (USSR) के ऐतिहासिक योगदान को याद दिलाया। उन्होंने लिखा कि 1950 के दशक से शुरू हुई भारत की विकास यात्रा में सोवियत संघ एक बेहद भरोसेमंद साझेदार रहा है। देश के शुरुआती इस्पात संयंत्र, भारी इंजीनियरिंग, खनन, ऊर्जा, तेल और गैस, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु उद्योगों को खड़ा करने में सोवियत मदद की भूमिका निर्णायक थी।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: PM मोदी ने पुतिन को दी 1,330 दोहों वाली किताब, शासन-कूटनीति का अनमोल ज्ञान; जानिए क्यों चुना ये तोहफा
बताया 1955 का किस्सा
कांग्रेस नेता ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि जुलाई 1955 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सोवियत संघ की 16 दिनों की यात्रा की थी। इसके जवाब में उसी साल सोवियत नेताओं निकोलाई बुल्गानिन और निकिता ख्रुश्चेव ने भारत का 20 दिवसीय दौरा किया था। इसी मजबूत आधार पर आगे चलकर 9 अगस्त 1971 को ऐतिहासिक 'भारत-सोवियत शांति, मित्रता और सहयोग संधि' पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की स्थिति को बेहद मजबूत बनाया।
'पीएम मोदी हर ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अकेले लेने की करते हैं कोशिश'
जयराम रमेश ने यह भी स्पष्ट किया कि 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद भी यह संबंध थमा नहीं। 1998 में तत्कालीन रूसी प्रधानमंत्री येवगेनी प्रमाकोव और बाद में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे नया जीवन दिया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय शुरू हुए और डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में विस्तारित हुए 'ब्रह्मोस मिसाइल' संयुक्त उद्यम का उदाहरण देते हुए कहा कि रक्षा सहयोग की यह निरंतरता हर दौर में जारी रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी हर ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अकेले लेने की कोशिश करते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि भारत की विदेश नीति और रूस के साथ रणनीतिक रिश्ते पिछले 70 सालों के सामूहिक प्रयासों और मजबूत ऐतिहासिक बुनियाद पर टिके हुए हैं।
