निर्वाचन आयोग (EC) की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) और कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन किया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग के दफ्तर का घेराव करने निकले प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को बैरिकेडिंग करनी पड़ी। इस दौरान कई कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए, जिसके बाद पुलिस ने IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और दिल्ली इकाई के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
IYC अध्यक्ष उदय भानु चिब हिरासत में
प्रदर्शन में दिखा अनोखा विरोध
भारतीय युवा कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान विरोध का एक अनोखा तरीका देखने को मिला। कई कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के चेहरे का मास्क पहन रखा था और उनके हाथ लोहे की जंजीरों में बंधे हुए थे, जिसके जरिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए। रायसीना रोड स्थित IYC मुख्यालय से शुरू हुआ यह मार्च जंतर-मंतर होते हुए चुनाव आयोग दफ्तर की ओर बढ़ना था। प्रदर्शनकारी हाथों में कांग्रेस के झंडे, पोस्टर और 'मनुस्मृति' की प्रतियां लिए हुए थे। साथ ही कुछ कार्यकर्ता डफली बजाते हुए नारेबाज़ी कर रहे थे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई थी।
"चुनाव आयोग किसी पार्टी की जागीर नहीं" - उदय भानु चिब
हिरासत में लिए जाने से पहले युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा "चुनाव आयोग किसी राजनीतिक दल या सरकार की संपत्ति नहीं है; यह भारत की जनता का है। जब हमारी चुनावी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, तो देश जवाबदेही और पारदर्शिता का हकदार है। ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए ताकि उठे सवालों की स्वतंत्र जांच हो सके। भारत का युवा लोकतंत्र की रक्षा करने वाली संस्थाओं पर सवाल उठने पर खामोश नहीं बैठेगा।" उल्लेखनीय है कि युवा कांग्रेस ने हाल ही में ऑनलाइन याचिका "Gyanesh, It's Done Bro" शुरू की है, जिसमें CEC को हटाने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है।
क्यों शुरू हुआ यह विवाद?
इस प्रदर्शन की मुख्य वजह इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में हुआ वह खुलासा है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर चुनाव आयोग के भीतर शक्तियों के केंद्रीयकरण पर चिंता जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की शक्तियां राज्यों के अधिकारियों से छीनकर केंद्रीय स्तर पर केंद्रित की जा रही थीं, जिस पर आयोग के भीतर ही मतभेद सामने आए।
