अब हुआ दूसरा 'गलवान' तो चीन की खैर नहीं, जवानों को दी जा रही खास ट्रेनिंग; बिना हथियार के भी जीत जाएंगे जंग

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  • Updated Oct 30, 2022, 05:11 PM IST

इस ट्रेनिंग के दौरान जवानों को जूडो, कराटे और क्राव मागा जैसी विभिन्न मार्शल आर्ट तकनीकों की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें पंचिंग, किकिंग, थ्रोइंग, जॉइंट लॉक और पिनिंग डाउन जैसी चालों की भी ट्रेनिंग शामिल है। इन ट्रेनिंगों के बाद जवानों को सीधी लड़ाई में काफी मदद मिलेगी।

चीन (China) के साथ लद्दाख (Ladakh) समेत कई सीमाओं पर तनातनी की स्थिति बनी हुई है। गलवाट घाटी (Galwan Valley) संघर्ष के बाद से यह तनातनी और बढ़ गई है। इसी को ध्यान में रखने हुए एक तरफ सरकार सीमा के नजदीक सड़कों का निर्माण करवा रही है, हथियारों की तैनाती हो रही है, हवाई पट्टी बनाई जा रही है तो दूसरी ओर जवानों को एक खास तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वो बिना हथियारों वाली इस लड़ाई को आसानी से जीत सकें।

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आईटीबीपी दे रही है जवानों को खास ट्रेनिंग (फाइल फोटो)

दरअसल जब चीनी सैनिकों ने गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हमला बोला था, तब उन्होंने गोली नहीं चलाई थी, आधुनिक हथियारों की जगह पारंपरिक हथियारों का प्रयोग किया था। तब भारत के जवानों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया था, लेकिन अब इसके लिए आईटीबीपी और जबरदस्त तैयारी कर रही है। चीन से लगती हुई इन सीमाओं की कमान आईटीबीपी के पास ही है। इसलिए आईटीबीपी अब अपने जवानों को बिना हथियारों के लड़ाई लड़ने की ट्रेनिंग दे रही है।

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