BJP New President: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के साथ संबंधों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि सिर्फ मौजूदा सरकार के साथ ही नहीं, हमारा हर सरकार के साथ अच्छा समन्वय रहा है। उन्होंने कहा कि कहीं कोई झगड़ा नहीं, लेकिन सभी मुद्दों पर एकमत होना संभव नहीं, हम हमेशा एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं। मैं शाखाओं के संचालन में निपुण हूं, भाजपा सरकार चलाने में निपुण है, हम एक-दूसरे को सिर्फ सुझाव दे सकते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत (फोटो साभार: ANI)
भाजपा अध्यक्ष के चयन में क्यों हो रही देरी?
मोहन भागवत ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में आरएसएस की भूमिका को लेकर बातचीत में साफ कर दिया कि हम फैसला नहीं करते, अगर हमें फैसला करना होता तो इतना समय लग जाता। हालांकि, नए अध्यक्ष के फैसले में हो रही देरी को लेकर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि अपना समय लें, हमें कुछ कहने की जरूरत नहीं है।
परिवार में 3 बच्चे जरूरी
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत की जनसंख्या नीति 2.1 बच्चों की है, यानी एक परिवार में तीन बच्चे। हर नागरिक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके परिवार में तीन बच्चे होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीन से बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ना चाहिए। जन्मदर कम होने की अगर बात है तो वह सबका कम हो रहा है।
क्यों जरूरी है नई शिक्षा नीति?
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि नई शिक्षा नीति इसलिए शुरू की गई, क्योंकि अतीत में विदेशी आक्रमणकारियों ने हम पर शासन किया था। हम उनके अधीन थे और उनके शासन में उनका उद्देश्य इस देश पर प्रभुत्व स्थापित करना था, न कि इसका विकास करना। उन्होंने राष्ट्र पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए प्रणालियां तैयार कीं, लेकिन अब जब हम स्वतंत्र हैं, तो हमारा लक्ष्य सिर्फ शासन करना नहीं, बल्कि अपने लोगों की सेवा और देखभाल करना है।
उन्होंने कहा कि तकनीक और आधुनिकता का कोई विरोध नहीं है। जैसे-जैसे मानव ज्ञान बढ़ता है, नई तकनीकें उभरती हैं और उन्हें कोई नहीं रोक सकता। वे मनुष्यों के लाभ के लिए आती हैं और यह मनुष्यों पर निर्भर करता है कि वे उनका उपयोग कैसे करते हैं। जब भी कोई तकनीक उभरती है, उसका उपयोग मानवता के लाभ के लिए किया जाना चाहिए। अगर कोई हानिकारक परिणाम हैं, तो हमें उनसे बचना चाहिए और उन्हें रोकना चाहिए।
आरएसएस सरकार को यह नहीं बताता कि ट्रंप से कैसे निपटें: मोहन भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि संघ सरकार को यह नहीं बताएगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कैसे निपटा जाए और वह उसके (सरकार के) निर्णय का समर्थन करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मित्रता पर दबाव नहीं होना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने कहा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार आवश्यक है और होना ही चाहिए, क्योंकि यह देशों के बीच संबंधों को भी बनाए रखता है। लेकिन यह दबाव में नहीं होना चाहिए; दोस्ती दबाव में नहीं पनप सकती। उन्होंने कहा, यह मुक्त होना चाहिए, आपसी सहमति पर आधारित होना चाहिए। हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर होना चाहिए, साथ ही यह समझना चाहिए कि दुनिया परस्पर निर्भरता पर चलती है, और उसी के अनुसार कार्य करना चाहिए। भागवत ने कहा कि हम सरकार को यह नहीं बताते कि ट्रंप से कैसे निपटना है; उन्हें पता है कि क्या करना है और हम उसका समर्थन करेंगे।
