Next ISRO Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) लगातार एक के बाद एक उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इसरो का पूरा ध्यान आगामी गगनयान मिशन पर टिका हुआ है, लेकिन कई अन्य मिशन भी लॉन्च होने वाले हैं। इसको लेकर, इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने शनिवार को अहम जानकारी दी। इसरो प्रमुख ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में सात प्रक्षेपण करने का लक्ष्य है और अगला मिशन अगले दो महीनों के भीतर होगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (फाइल फोटो)
विक्रम-1 रॉकेट ने भरी ऐतिहासिक उड़ान
'स्काईरूट एयरोस्पेस' के 'विक्रम-1' रॉकेट के ऐतिहासिक पहले 'ऑर्बिटल' प्रक्षेपण के बाद वी. नारायणन ने बताया कि दो उपग्रह पहले ही पूरी तरह से तैयार हो चुके हैं, जबकि पांच से छह अन्य उपग्रह एकीकरण के आखिरी चरण में हैं। 'ऑर्बिटल' रॉकेट को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह उपग्रह की रफ्तार को इतना बढ़ा दे कि अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद यह नीचे गिरने के बजाय पृथ्वी की कक्षा (ऑर्बिट) में ही रहे।
कब लॉन्च होगा अगला मिशन?
नारायणन ने कहा, ''इस वित्त वर्ष में हमने कम से कम सात प्रक्षेपण का लक्ष्य रखा है। हम दो महीने के अंदर प्रक्षेपण शुरू कर देंगे।'' अंतरिक्ष एजेंसी के आगामी प्रक्षेपण कार्यक्रमों में गगनयान मानव अंतरिक्षयान उड़ान कार्यक्रम के तहत पहला बिना चालक दल वाला मिशन और तय उपग्रह प्रक्षेपण शामिल हैं।
निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहले 'ऑर्बिटल' रॉकेट 'विक्रम-1' की सफल उड़ान की सराहना करते हुए इसरो प्रमुख ने युवा टीम (जिसके सदस्यों की औसत उम्र 28 साल है) की तारीफ की, क्योंकि उन्होंने अपनी पहली ही कोशिश में मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया।
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उन्होंने कहा कि इस बड़ी कामयाबी से देश के अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े समुदाय को बहुत खुशी मिली है और यह ''भारत 2047'' की दृष्टि में भी अहम योगदान देती है। 'स्काईरूट एयरोस्पेस' के दोनों सह-संस्थापक, पवन कुमार चांदना और नागा भरत डाका, पूर्व में इसरो के वैज्ञानिक रह चुके हैं।
बाद में, 'पीटीआई वीडियो' से बात करते हुए नारायणन ने इसरो के गर्व की भावना की तुलना उन माता-पिता की खुशी से की, जो अपने बच्चों को कामयाब होते हुए देखते हैं। उन्होंने कहा, ''हम बिल्कुल उन माता-पिता की तरह हैं, जो बच्चों को अच्छी तरह पढ़ते और पहली रैंक हासिल करते देखकर उत्साहित और गौरवान्वित महसूस करते हैं।''
