Fadanvis-Udhhav Thackeray Meeting : महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ बड़ा होने की अटकलें लग रही हैं। ये अटकलें राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच हुई मुलाकात के बाद लगनी शुरू हुई है। दोनों नेताओं के बीच बीते 24 घंटे में दो बार मुलाकात हुई हैं। एक दिन पहले फड़णवीस ने मजाकिया अंदाज में उद्धव को साथ आने का न्योता दिया। फिर विधानसभा में दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई और अब बताया जा रहा है कि फड़णवीस और उद्धव की मुलाकात एक बार फिर हुई है।
गुरुवार को विधानसभा में हुई फड़णवीस-उद्धव की मुलाकात। तस्वीर-@ShivSenaUBT
मुंबई में आज राज ठाकरे की रैली
इससे सियासी गलियारे में भाजपा और उद्धव के साथ आने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे की शुक्रवार को मुंबई के मीरा रोड पर आज रैली होनी है। समझा जाता है कि इस रैली में राज ठाकरे अपनी भविष्य की योजना, राजनीतिक एजेंडे और मुंबई में हिंदीभाषी लोगों की पिटाई पर अपनी बात रख सकते हैं।
20 मिनट तक चली बैठक
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार फडणवीस और ठाकरे की यह मुलाकात गुरुवार को विधान परिषद के अध्यक्ष राम शिंदे के कार्यालय में हुई। यह मुलाकात लगभग 20 मिनट तक चली। इससे पहले बुधवार को फडणवीस ने कहा था कि ठाकरे अलग तरीके से सत्ता पक्ष में आ सकते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा को संबोधित करते हुए CM ने कहा कि 2029 तक BJP के विपक्ष में आने की कोई संभावना नहीं है। इस भेंट में पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे और वर्ली से विधायक आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे।
विधानसभा में फड़णवीस ने क्या कहा
फडणवीस ने कहा था, ‘उद्धव जी, 2029 तक (सरकार में बदलाव की) कोई गुंजाइश नहीं है। हमारे पास दूसरे तरफ (विपक्ष) जाने की गुंजाइश नहीं है। आपके पास यहां आने की गुंजाइश है और इस पर विचार किया जा सकता है। हम इसके बारे में अलग तरह से सोच सकते हैं।’विधानभवन परिसर में संवाददाताओं द्वारा इस भेंट के विषय में पूछे जाने पर आदित्य ठाकरे ने कहा कि यह भेंट मराठी भाषा संबंधी मुद्दों पर चर्चा के लिए की गई थी। आदित्य ठाकरे ने कहा, ‘हमने इस बात पर अपना विचार रखा कि पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में क्यों नहीं थोपा जाना चाहिए। हमने विशेषज्ञों और गैर-राजनीतिक व्यक्तियों द्वारा लिखे गए लेखों का एक संग्रह दिया।’
2029 का चुनाव देख रही भाजपा
एक्सपर्ट का मानना है कि मराठी मुद्दे पर जिस तरह से उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच नजदीकी बढ़ी है, उसने भाजपा को सोचने के लिए मजबूर किया है। दोनों भाइयों के एक साथ आने पर मराठी वोटरों का भी ध्रुवीकरण होगा, इससे भाजपा को लगता है कि उसे 2029 के चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए फड़णवीस ने सीधे तौर पर उद्धव को ऑफर तो नहीं दिया है लेकिन संकेत जरूर दिया है कि यदि वह मन बनाएं तो बात आगे बढ़ सकती है।
2019 में उद्धव ने एनडीए छोड़ दिया
शिवसेना और भाजपा ने 25 साल तक साथ मिलकर महाराष्ट्र में राजनीति की है। दोनों के बीच गठबंधन को 'नैसर्गिक' है। दोनों की विचारधारा एक दूसरे से मेल खाती है लेकिन 2014 में सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों में दरार आ गई। 2019 में उद्धव ठाकरे ने भाजपा से नाता तोड़कर कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। लेकिन 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद सरकार गिर गई और फडणवीस ने शिंदे के साथ मिलकर सत्ता संभाली। तब से कई बार मीडिया में रिपोर्टें आई हैं कि बदलते सियासी समीकरणों और राजनीतिक जरूरतों को देखते हुए दोनों दलों में सुलह हो सकती है और उद्धव एक बार फिर एनडीए में शामिल हो सकते हैं।
