भारतीय रेलवे देश की लाइफलाइन है। इतने बड़े देश को एक सूत्र में पिरोने में रेलवे की बड़ी भूमिका है। रेलवे की तरफ से कोई भी घोषणा होती है तो लोग उसे बड़े ध्यान से सुनते हैं। रेल मंत्रालय ने देश में रेल नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में आज एक और अहम कदम उठाते हुए गुजरात और बिहार में दो बड़ी रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की कुल लागत 647.58 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इनका उद्देश्य रेल कनेक्टिविटी बढ़ाना, भीड़भाड़ कम करना और ट्रेनों के संचालन को ज्यादा सुरक्षित व कुशल बनाना है।
रेल मंत्रालय ने बिहार और गुजरात के लिए रेल परियोजनाओं की घोषणा की
कोसांबा-उमरपाड़ा गेज कन्वर्जन और RoR
आज की घोषणा में जो पहली परियोजना है वह पश्चिम रेलवे के तहत आती है। इसके तहत गुजरात में कोसांबा-उमरपाड़ा गेज कन्वर्जन सेक्शन (9.20 किमी) के लिए रेल ओवर रेल (RoR) फ्लाईओवर के निर्माण से जुड़ी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 344.38 करोड़ रुपये है। बता दें कि फिलहाल यह सेक्शन मुंबई-वडोदरा मुख्य लाइन के पूर्वी हिस्से में स्थित है और इस पर गेज बदलने का काम किया जा रहा है।
इस क्षेत्र में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के कारण सीधे जमीन पर क्रॉसिंग संभव नहीं है। इसी लिए यहां इस फ्लाईओवर के निर्माण से गेज कन्वर्जन लाइन को मुख्य लाइन से निर्बाध रूप से जोड़ा जा सकेगा। इससे ट्रेनों की आवाजाही सुरक्षित और बिना रुकावट के हो सकेगी, जिससे इस परियोजना के पूरा लाभ लोगों को मिलेगा।
भागलपुर में रेल बाईपास
घोषणा के तहत दूसरी महत्वपूर्ण परियोजना पूर्व रेलवे के अंतर्गत बिहार के भागलपुर में 13.38 किलोमीटर लंबे रेल बाईपास के निर्माण की है, जिसकी लागत 303.20 करोड़ रुपये तय की गई है। यह बाईपास गोनूधाम हॉल्ट को सबौर स्टेशन से जोड़ेगा, जिससे भागलपुर जंक्शन पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकेगा।
फिलहाल बराहाट-भागलपुर सेक्शन अपनी क्षमता से 125 फीसद ज्यादा पर संचालित हो रहा है, जिससे यहां भारी जाम की स्थिति बनती है। यही नहीं, ट्रेनों को दिशा बदलने के लिए भागलपुर में इंजन रिवर्स भी करना पड़ता है, जिससे समय की बर्बादी और ट्रेनों के संचालन में दिक्कत आती है। नए बाईपास के बनने से इन समस्याओं का समाधान होगा और उम्मीद की जानी चाहिए कि ट्रेनें समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच पाएंगी।
रेल मंत्रालय का मानना है कि ये दोनों परियोजनाएं गुजरात और बिहार में रेल ढांचे को मजबूती देंगी। साथ ही, यात्रियों और माल परिवहन की बढ़ती मांग को पूरा करने में भी मददगार साबित होंगी। सरकार लगातार रेल नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण पर जोर दे रही है, ताकि देश में परिवहन व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सके।
