हथियार नहीं, विश्वास से मापी जाती है असली समुद्री ताकत; जानें भारतीय नौसेना का नया अध्याय

करीब आधी सदी पहले नौसेनाओं की भूमिका को शक्ति, संवाद और सुरक्षा के संतुलन से जोड़ा गया था, और आज भारतीय नौसेना इस सोच को व्यवहार में उतारती दिखाई देती है। तटीय सीमाओं से आगे बढ़कर भारत ने इंडो-पैसिफिक में सहयोग, विश्वास और साझेदारी पर आधारित समुद्री उपस्थिति बनाई है। आपदा राहत से लेकर रणनीतिक सहभागिता तक, भारतीय नौसेना भरोसे को अपनी सबसे बड़ी समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।

करीब पांच दशक पहले नौसैनिक रणनीतिकार केन बूथ ने नौसेनाओं की भूमिका को सैन्य शक्ति, कूटनीति और पुलिसिंग के संतुलन के रूप में परिभाषित किया था। आज भारतीय नौसेना इस सिद्धांत का सबसे सशक्त उदाहरण बन चुकी है। तटीय रक्षा तक सीमित रहने के बजाय भारतीय नौसेना अब पूरे इंडो-पैसिफिक में एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। भारतीय महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत ने टकराव की जगह सहयोग और विश्वास निर्माण का रास्ता चुना है। नियमित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास, क्षमता निर्माण और समुद्री डोमेन अवेयरनेस साझा करने से भारत ने क्षेत्रीय देशों के साथ मजबूत साझेदारी बनाई है।

Indian Navy's Indo-Pacific Playbook

भारतीय नौसेना की इंडो-पैसिफिक प्लेबुक

भारतीय नौसेना ने इनमें लिया हिस्सा

साल 2025 में भारतीय नौसेना ने 18 से अधिक द्विपक्षीय अभ्यास, 8 बहुपक्षीय अभ्यास, 31 मैरीटाइम पार्टनरशिप एक्सरसाइज, 4 CORPAT, 12 संयुक्त EEZ निगरानी अभियानों में हिस्सा लिया। भारतीय नौसेना की भूमिका “Net Security Provider” से आगे बढ़कर अब साझेदारी आधारित मॉडल में बदल चुकी है। वियतनाम को INS Kirpan, मोजाम्बिक को फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट और श्रीलंका में Maritime Rescue Coordination Centre जैसी पहलें इस सोच को दर्शाती हैं कि भारत अपने पड़ोसियों को सक्षम बनाना चाहता है, नियंत्रित नहीं।

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