India China Border: भारतीय सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की घेरेबंदी के लिए कमर कस ली है। चीन के खिलाफ अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए सेना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 545 किमी तक फैले केंद्रीय क्षेत्र में बरेली-मुख्यालय वाले प्रशासनिक गठन को युद्ध लड़ने वाले कार्यों के साथ एक कोर मुख्यालय में परिवर्तित करेगी। यह कोर मुख्यालय केंद्रीय क्षेत्र की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होगा।
भारतीय सेना
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उत्तर भारत (यूबी) क्षेत्र को केंद्रीय क्षेत्र की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार एक कोर मुख्यालय में तब्दील किए जाने की उम्मीद है, जिसे वर्तमान में भारत और चीन के बीच विवादित सीमा का सबसे कम विवादित क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र में एकमात्र विवाद उत्तराखंड के बाराहोती में है।
अतिरिक्त सैनिकों की होगी तैनात
पूर्व उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुडा (सेवानिवृत्त) ने एचटी को बताया कि उत्तर भारत (यूबी) एरिया में हमेशा केंद्रीय क्षेत्र में एलएसी के साथ कुछ परिचालन जिम्मेदारियां होती हैं, लेकिन एक बड़े पैमाने पर प्रशासनिक मुख्यालय होने के कारण यह क्षेत्र युद्ध लड़ने जैसे कार्यों के लिए व्यवस्थित नहीं था। हालांकि, अब केंद्रीय क्षेत्र के लिए यहां अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही यूबी क्षेत्र को कोर मुख्यालय में परिवर्तित करना एक अच्छा कदम है। इससे चीन के साथ एलएसी पर बढ़ते विवाद के बीच परिचालन क्षमता मजबूत होगी। बता दें, सेना ऐसे समय में केंद्रीय क्षेत्र में अपना ध्यान केंद्रित कर रही है जब भारत और चीन के बीच बीते चार सालों से लद्दाख में गतिरोध बना हुआ है।
तीन सेक्टरों में बंटा हुआ है एलएसी
बता दें, 3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी को तीन सेक्टरों में विभाजित किया गया है, जिसमें उत्तर भारत (यूबी) के साथ पश्चिमी (लद्दाख) और पूर्वी (सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश) शामिल हैं। इसमें पश्चिमी सेक्टर (लद्दाख) सबसे ज्यादा संवेदनशील है, जहां भारत और चीन के सैनिकों के बीच गतिरोध हुआ था। वहीं, पूर्वी सेक्टर में अरुणाचल प्रदेश में भी गतिरोध बना हुआ है। वहीं यूबी एरिया, जो लखनऊ स्थित सेंट्रल कमांड के अंतर्गत आता है।
