Tunnel Boring Machines: भारत में रेलवे, हाईवे और बिजली जैसे बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास के साथ टनल बोरिंग मशीनों (TBM) की मांग भी बढ़ रही है। इन मशीनों का इस्तेमाल जमीन के भीतर सुरंग बनाने के लिए किया जाता है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को बताया कि देश में रेलवे, हाईवे और पावर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में टनल बोरिंग मशीनों (TBM) का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव
बकौल अश्विनी वैष्णव, एक समय ऐसा था जब टनल बोरिंग मशीन को इंपोर्ट किया जाता था, लेकिन अब देश में ही अलग-अलग आकार की TBM का निर्माण होने लगा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब 8 मीटर डायमीटर वाली सारी टनल बोरिंग मशीन देश में बनने लग गई हैं। साथ ही, 15 मीटर डायमीटर वाली मशीनों की भी मैन्यूफैक्चरिंग हो रही है।
कहां है TBM है प्लांट
अश्विनी वैष्णव के बताया कि तमिलनाडु में टीबीएम का प्लांट है। बहुत जल्द ही देश में 16 मीटर से ज्यादा डायमीटर वाली टीबीएम भी बनेंगी। भारत टीबीएम के डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस तक के पूरे इकोसिस्टम में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो रहा है
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: पीलीभीत की मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप, कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल; कोर्ट जाने की कर रही तैयारी
ऋषिकेश से कर्णप्रयाग परियोजना
इस बीच, ऋषिकेश से कर्णप्रयाग रेल परियोजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया। बताया जा रहा है कि 125 किलोमीटर लंबी परियोजना का लगभग 83 फीसदी हिस्सा टनल से होकर गुजरेगा। इस परियोजना में 16 टनल और 19 पुल हैं, जिसमें टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि, टीबीएम का इस्तेमाल करने से पहले भूगर्भीय परिस्थितियों की जांच की गई। इस परियोजना में शिवपुरी, व्यासी, देवप्रयाग, जलासू, मलेथा, श्रीनगर समेत अन्य स्टेशन प्रस्तावित हैं, जो क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी बढ़ाएंगे।
