Pinaka Rocket System: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने प्रोविजनल स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स (पीएसक्यूआर) वैलिडेशन ट्रायल के तहत गाइडेड पिनाका हथियार प्रणाली के उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। उड़ान परीक्षण तीन चरणों में अलग-अलग फील्ड फायरिंग रेंज में किए गए हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम के हाल ही में कई सफल परीक्षण किए थे। ये परीक्षण अलग-अलग फील्ड फायरिंग रेंज में किए गए थे मकसद था रेंज, सटीकता, स्थिरता आदि की जांच करना। जिसमें पिनाका रॉकेट सिस्टम ने सफलता हासिल की।
पिनाका रॉकेट सिस्टम का हुआ सफल परीक्षण
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इन परीक्षणों के दौरान, रॉकेटों के व्यापक परीक्षण के माध्यम से 'प्रोविजनल स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट यानी पीएसक्यूआर के मापदंडों, जैसे कि रेंजिंग, सटीकता, स्थिरता और सैल्वो मोड (सैल्वो तोपखाने या आग्नेयास्त्रों का एक साथ इस्तेमाल है जिसमें लक्ष्य को भेदने के लिए तोपों से गोलीबारी शामिल है) में कई लक्ष्यों पर निशाना साधने की दर का आकलन किया गया है। बयान में कहा गया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पीएसक्यूआर वेलिडेशन टेस्ट के भाग के रूप में निर्देशित पिनाका हथियार प्रणाली के उड़ान परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि लांचर उत्पादन एजेंसियों द्वारा अपग्रेड किए गए दो इन-सर्विस पिनाका लांचर से कुल बारह रॉकेटों का परीक्षण किया गया है।
पिनाका सिस्टम दुश्मनों के लिए बनेगा काल
बता दें, पिनाका सिस्टम दुश्मनों के लिए काल है। इसकी मारक क्षमता में जबरदस्त इजाफा हुआ है। अब ये 75 किलोमीटर दूर तक 25 मीटर के दायरे में सटीक निशाना लगा सकती है। इसकी रफ्तार 1000-1200 मीटर प्रति सेकेंड है, यानी एक सेकेंड में एक किलोमीटर। फायर होने के बाद इसे रोकना नामुमकिन है। पहले पिनाका की मारक क्षमता 38 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर 75 किलोमीटर हो जाएगी। इसकी सटीकता भी पहले से कई गुना बेहतर हुई है। जानकारी के मुताबिक, रॉकेट लॉन्चर के तीन वैरिएंट्स हैं। MK-1, MK-2, और MK-3 (निर्माणाधीन हैं। इस लॉन्चर की लंबाई 16 फीट 3 इंच से लेकर 23 फीट 7 इंच तक है। इसका व्यास 8.4 इंच है। इस रॉकेट सिस्टम का नाम भगवान शिव के धनुष पिनाक के नाम पर रखा गया है। इस धनुष का प्रयोग भगवान परशुराम करते थे।
