केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान में मौजूद 23 व्यक्तियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) के तहत शनिवार को आतंकवादी घोषित किया है। ये लोग पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और अन्य आतंकी संगठनों से हैं। इनमें से छह भारतीय नागरिक हैं, जो अब पाकिस्तान या पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में रहते हैं।
गृह मंत्रालय ने जारी की 23 आतंकियों की नई सूची।
गृह मंत्रालय के अनुसार, इन सभी पर भारत में घुसपैठ, आतंकियों की भर्ती, हथियार और रसद उपलब्ध कराने, आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने तथा भारत में हमलों की साजिश रचने के आरोप हैं।
नई सूची में जोड़े गए इन लोगों के नाम
केंद्र सरकार ने जिन लोगों के नाम जोड़े हैं, उनमें जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों में मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसद्दिक उर्फ डॉक्टर, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान उर्फ अबू साद, हाफिज अब्दुल शकूर उर्फ कारी जर्रार, अब्दुल्ला जिहादी, गुलाम फरीद, मौलाना इमदादउल्ला मक्की और वसीम नूर जट शामिल हैं।
इसी तरह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों में फिरदौस अहमद भट, हारून राशिद गनई, बिलाल अहमद मीर, आबिद कय्यूम लोन, नज़ीर अहमद गुज्जर, अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रऊफ, अशफाक अहमद, हाफिज खालिद वलीद, मौलाना सैफुल्लाह खालिद, मोहम्मद याकूब, मौलाना यूसुफ तैबी, ओवैस फारूज, कारी याकूब शेख, राणा इफ्तिखार और मोहम्मद शहीद फैसल शामिल है। फैसल अल-कायदा और आईएसआईएस से भी जुड़ा है।
हाफिज मोहम्मद सईद के दामाद का भी नाम शामिल
सूची में हाफिज मोहम्मद सईद के दामाद हाफिज खालिद वलीद का नाम भी शामिल है। वह लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा से जुड़ा है तथा संगठन की केंद्रीय सलाहकार समिति का सदस्य रहा है। गृह मंत्रालय के अनुसार, वह 2016 के पंपोर आतंकी हमले का मास्टरमाइंड है। अमेरिका भी उसे पहले ही वैश्विक आतंकवादी घोषित कर चुका है।
मसूद इलियास कश्मीरी है मौलाना मसूद अजहर का करीबी सहयोगी
गृह मंत्रालय ने मसूद इलियास कश्मीरी को भी आतंकवादी घोषित किया है। वह जैश प्रमुख मौलाना मसूद अजहर का करीबी सहयोगी माना जाता है और कश्मीर में घुसपैठ कराने, सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भर्ती तथा आतंक के लिए फंड जुटाने का काम करता है। उस पर अप्रैल 2022 में जम्मू के सुनजवां में पुलिस चौकी पर हुए हमले की साजिश रचने का भी आरोप है।
मोहम्मद मुसद्दिक ने की थी अयोध्या राम मंदिर की रेकी
मोहम्मद मुसद्दिक ने अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर, नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मुख्यालय और पानीपत में आईओसीएल रिफाइनरी की टोह लेने में अहम भूमिका निभाई थी।
जेईएम और हरकत-उल-मुजाहिदीन से जुड़े हाफिज अब्दुल शकूर पर आरोप है कि उसने नगरोटा सैन्य शिविर पर हमले के लिए सांबा-कठुआ सेक्टर से तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की घुसपैठ में मदद की थी।
अब्दुल्ला जिहादी जेईएम का एक गुर्गा है। उसने असगर के साथ मिलकर साजिश रची, उत्तरी कश्मीर में घुसपैठ में मदद की, भारत सरकार के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश की और कुपवाड़ा व बारामूला में आतंकी घुसपैठ में मदद की।
सीमा पार रहने वाले भारतीय नागरिकों में लश्कर से जुड़ा फिरदौस अहमद भट भी शामिल है। मंत्रालय ने बताया कि फिरदौस 2018 में वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गया था। वह ’लॉन्चिंग कमांडर’ के तौर पर काम करता है, एलओसी के पार घुसपैठ में मदद करता है, आतंकी सहयोगियों को हथियार पहुंचाता करता है और दक्षिण कश्मीर में युवाओं को बरगला कर भर्ती करता है।
मंत्रालय ने बताया कि जेईएम से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक गुलाम फरीद उर्फ गुलशन कुमार ने 2001 से 2005 तक पाकिस्तान सेना में काम किया था। फरीद 2008 में बांग्लादेश के रास्ते गैर-कानूनी तरीके से भारत में घुसा था, उसी साल बाद में उसे जम्मू में गिरफ्तार किया गया और जुलाई 2019 में पाकिस्तान निर्वासित किया गया।
पाकिस्तान में रहने वाले और लश्कर से जुड़े भारतीय नागरिक हारून रशीद गनई पर आरोप है कि वह 2018 में पाकिस्तान गया, वहां संगठन में शामिल हुआ, कश्मीर घाटी से लोगों को संगठन में भर्ती करने के लिए बरगलाता है और आतंकियों के सहयोगियों को हथियार और गोला-बारूद पहुंचाता है।
भारतीय नागरिक बिलाल अहमद मीर मुजफ्फराबाद (पीओजेके) में रहता है और लश्कर तथा ’द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) से जुड़ा हुआ है। वह सीमा के उस पार से स्थानीय कश्मीरी युवाओं को जिहाद के लिए उकसाने और भड़काने का काम करता है।
पीओजेके में रहने वाले भारतीय नागरिक आबिद कय्यूम लोन पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश रचने और लश्कर के लिए वित्त पोषण जुटाने का आरोप है। एक और भारतीय नागरिक नजीर अहमद गुज्जर ने डोडा और किश्तवाड़ में युवाओं को भर्ती किया और सांबा और आरएस पुरा सेक्टर के जरिए ड्रोन से हथियार और गोला-बारूद की खेप पहुंचाने में मदद की। 2006 में एलओसी पार करने के बाद से वह इस्लामाबाद में रह रहा है।
मंत्रालय ने बताया कि जिन लश्कर आंतकियों को नामित किया गया है, उनमें अब्दुल रऊफ शामिल है। वह 1999 से लश्कर के वरिष्ठ नेता के तौर पर काम कर रहा है। वह फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन और अल-मदीना वेलफेयर ट्रस्ट जैसे संगठनों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्त पोषण और जन समर्थन जुटाता है। अब्दुल का नाम अमेरिका की वैश्विक आतंकियों की सूची में भी शामिल है।
मौलाना मसूद अजहर का करीबी सहयोगी मौलाना इमदादउल्ला मक्की जेईएम के कानूनी मामलों का प्रमुख है। अधिकारियों का कहना है कि मक्की ने जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले में शामिल आतंकवादियों के साथ लगातार तालमेल बिठाया था।
