रूस और खाड़ी देशों से आगे बढ़ा भारत, बदल रहा तेल का नक्शा, क्यों वेनेज़ुएला की अभी है बहुत जरूरत?

India Venezuela oil deals: तेल आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर भारत, रूस और पश्चिम एशिया से हटकर ऊर्जा के अन्य स्रोत तलाशने के लिए वेनेज़ुएला के साथ लंबे समय के ऊर्जा समझौतों की कोशिश कर रहा है।

Times Now Navbharat Explainer: पिछले तीन सालों में ज्यादातर समय, भारत की तेल से जुड़ी कहानी असल में रूस से जुड़ी कहानी रही है। यूक्रेन युद्ध के बाद, रूस से सस्ते दाम पर मिले कच्चे तेल ने भारत के आयात के तौर-तरीकों को बदल दिया। इससे मॉस्को, नई दिल्ली का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया और इससे ग्लोबल स्तर पर कीमतों में उतार-चढ़ाव के असर से ग्राहकों को बचाने में मदद मिली। लेकिन अब कई भू-राजनीतिक उथल-पुथल, जैसे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और प्रतिबंधों व शिपिंग रूट (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य) को लेकर अनिश्चितता, यह भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर रही हैं।

रूस और खाड़ी देशों से आगे बढ़ा भारत, बदल रहा तेल का नक्शे, क्यों वेनेज़ुएला की अभी है बहुत जरूरत?

रूस और खाड़ी देशों से आगे बढ़ा भारत, बदल रहा तेल का नक्शे, क्यों वेनेज़ुएला की अभी है बहुत जरूरत?

इसीलिए वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की भारत यात्रा के बाद, नई दिल्ली वेनेज़ुएला के साथ लंबे समय के लिए ऊर्जा समझौतों पर बातचीत कर रही है। ये बातचीत सिर्फ ज्यादा तेल खरीदने के बारे में नहीं है। यह भारत के ऊर्जा मैप को फिर से तैयार करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है, जिसमें सप्लायर्स में विविधता लाना, जोखिम भरे रास्तों पर निर्भरता कम करना और लंबे समय के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।

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