राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि भारत और लिकटेंस्टीन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रिसर्च, कौशल विकास और क्लीन टेक्नोलॉजी (स्वच्छ तकनीक) जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। लिकटेंस्टीन के हेरेडिटरी प्रिंस एलोइस और प्रिंसेस सोफी तथा उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए, राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि मौजूदा अनिश्चित भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक माहौल में, दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और लिकटेंस्टीन के हेरेडिटरी प्रिंस एलॉइस
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, 'अपनी-अपनी खूबियों को मिलाकर, हम ऐसे इनोवेटिव समाधान विकसित कर सकते हैं जो हमारी साझा चुनौतियों का सामना कर सकें और हमारे लोगों के लिए नए अवसर पैदा कर सकें। मुझे विश्वास है कि इससे दोनों देशों के उद्यमियों, शोधकर्ताओं और युवा पेशेवरों के बीच सहयोग और बढ़ेगा।'उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने भी दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे के करीब लाया है।भोज के दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा, 'आपके देश में योग की बढ़ती लोकप्रियता भारत की परंपराओं के प्रति आपकी रुचि को दर्शाती है।'
TIMES NOW Navbharat पर पढ़ें: इजरायल में चुनाव, नेतन्याहू के सियासी भविष्य से लेकर अरब पार्टियों के रोल तक
राष्ट्रपति ने बताया कि भारत और लिकटेंस्टीन के बीच व्यापार, निवेश, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, इनोवेशन, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के बीच 2024 में हुआ 'व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता' (TEPA), व्यापार और निवेश संबंधों को और गहरा करने के नए रास्ते खोलता है।
'लिकटेंस्टीन की कई कंपनियां भारत के साथ सहयोग बढ़ाने में गहरी रुचि दिखा रही'
राष्ट्रपति मुर्मू ने विश्वास जताया कि अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को सुविधाजनक बनाने और 10 लाख (1 मिलियन) प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करने की प्रतिबद्धता, भारत और लिकटेंस्टीन की साझा प्राथमिकताओं के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि लिकटेंस्टीन की कई कंपनियां भारत के साथ सहयोग बढ़ाने में गहरी रुचि दिखा रही हैं। इनमें एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, फिनटेक, कृषि अनुसंधान, टिकाऊ बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य सेवा और मैटेरियल साइंस जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
राष्ट्रपति कार्यालय के एक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति ने कहा कि कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण की भी काफी संभावनाएं हैं, खासकर उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देकर। उन्होंने कहा कि एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और फाइनेंशियल सर्विसेज के क्षेत्रों में लिकटेंस्टीन की विशेषज्ञता को, भारत की कुशल कार्यशक्ति, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ मिलाकर 'हम एक ऐसी साझेदारी बना सकते हैं जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो'
यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने में योगदान देगा
बयान में कहा गया है कि दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि भारत और लिकटेंस्टीन के बीच करीबी सहयोग से दोनों देशों के लोगों को बहुत फायदा हो सकता है।इसमें यह भी कहा गया कि वे इस बात पर सहमत हुए कि यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने में योगदान देगा।इससे पहले दिन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रिंस एलॉइस के बीच व्यापार, तकनीक और प्रतिभाओं की आवाजाही जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने पर व्यापक बातचीत हुई। प्रिंस एलॉइस, जो फिलहाल इस छोटे से यूरोपीय देश के कार्यवाहक प्रमुख हैं, रविवार से भारत की चार दिवसीय यात्रा पर हैं।
