Times Network India Health Summit 2026 South Edition में तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने हेल्थकेयर को राष्ट्र निर्माण की सबसे अहम प्राथमिकताओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सिर्फ सरकार का एक विभाग नहीं, बल्कि हर नागरिक की पहली सुरक्षा है। क्योंकि जब स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर होती है, तो उसका असर सिर्फ एक मरीज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। एक बीमारी कई बार किसी परिवार की वर्षों की मेहनत और आर्थिक स्थिरता को हिला देती है।
इंडिया हेल्थ समिट 2026 में तेलंगाना के डिप्टी सीएम भट्टी विक्रमार्क मल्लू।
'स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने की चुनौती'
स्वास्थ्य को विकास की बुनियादी जरूरत बताते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि एक मजबूत हेल्थ सिस्टम का मतलब सिर्फ बड़े अस्पताल और आधुनिक मशीनें नहीं हैं। असली स्वास्थ्य व्यवस्था वह है जहां हर नागरिक को समय पर इलाज, सस्ती दवाएं, शुरुआती जांच, बेहतर पोषण और सम्मान के साथ चिकित्सा सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में मजबूत मॉडल तैयार किया है। यहां बेहतर मेडिकल संस्थान, अस्पताल, फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी, रिसर्च और हेल्थ-टेक का मजबूत नेटवर्क मौजूद है। लेकिन अब अगली चुनौती स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा किफायती, सुलभ और आम लोगों तक पहुंचाने की है।
तेलंगाना सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का जिक्र करते हुए उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने कहा कि गरीब परिवारों को बीमारी की वजह से आर्थिक संकट में नहीं जाना चाहिए। राजीव आरोग्यश्री जैसी योजनाओं के जरिए इलाज का आर्थिक बोझ कम करने और ज्यादा लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने भविष्य के हेल्थकेयर मॉडल पर जोर देते हुए कहा कि अब जरूरत बीमारी के बाद इलाज करने की नहीं, बल्कि बीमारी को पहले ही रोकने की है। आने वाला समय प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का होगा, जहां स्क्रीनिंग, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, जीवनशैली में बदलाव और शुरुआती जांच सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
AI और डिजिटल हेल्थ पर फोकस
समिट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक तभी सार्थक होगी जब वह बड़े शहरों के अस्पतालों तक सीमित न रहकर गांवों और दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाए। उन्होंने कहा कि AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मरीजों की बेहतर जांच, डॉक्टरों की मदद और समय पर बीमारी की पहचान के लिए होना चाहिए। लेकिन इसके साथ मरीजों के डेटा की सुरक्षा, गोपनीयता और भरोसा भी उतना ही जरूरी है।
हेल्थकेयर का असली लक्ष्य
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था की सफलता अस्पतालों की ऊंची इमारतों या अत्याधुनिक उपकरणों से नहीं मापी जाएगी, बल्कि इस बात से तय होगी कि क्या एक गरीब परिवार बिना डर के इलाज करा सकता है, क्या किसी मां को सुरक्षित प्रसव मिल रहा है और क्या हर मरीज को सम्मान के साथ स्वास्थ्य सेवा मिल रही है।
इंडिया हेल्थ समिट 2026 साउथ एडिशन का संदेश साफ रहा- भारत को अब केवल 'Sick Care' से आगे बढ़कर 'Health Care' की ओर जाना होगा। यानी इलाज के बाद नहीं, बीमारी से पहले बचाव; सिर्फ अस्पतालों तक नहीं, बल्कि घर और समुदाय तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचानी होंगी। यही भविष्य के मजबूत और समावेशी भारत की नींव होगी।
