देहरादून में कथित नस्लीय हमले के बाद त्रिपुरा के एक छात्र की हाल ही में हुई हत्या के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने एकता और सामाजिक सद्भाव का आह्वान करते हुए जोर दिया कि भारत सबका है और लोगों को जाति, धन, भाषा या क्षेत्र के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए। बुधवार को छत्तीसगढ़ के सोनपाईरी गांव में एक सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा, लोगों को जाति, धन, भाषा या क्षेत्र के आधार पर मत आंकिए। सबको अपना समझिए। पूरा भारत मेरा है।
मोहन भागवत ने दिया एकता का संदेश
त्रिपुरा के छात्र की देहरादून में हत्या
देहरादून के एक सड़क किनारे कैंटीन में हुए हमले के बाद 17 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे एमबीए के अंतिम वर्ष के छात्र एंजेल चकमा की 26 दिसंबर को मौत हो गई थी। उसके पिता का आरोप है कि एंजेल पर हमला तब हुआ जब वह अपने छोटे भाई का बचाव कर रहा था, जिसे कथित तौर पर नस्लीय गालियां दी गईं और "चीनी" कहा गया। बताया जाता है कि एंजेल द्वारा अपनी भारतीय पहचान पर जोर देने के बाद हमलावरों ने धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया।
आरएसएस प्रमुख ने दिया एकता पर जोर
आरएसएस प्रमुख ने दोहराया कि सद्भाव की दिशा में पहला कदम अलगाव और भेदभाव की भावनाओं को खत्म करना है, और सभी से एक-दूसरे को समान रूप से देखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, सद्भाव की दिशा में पहला कदम है मन से अलगाव और भेदभाव की भावना को दूर करना और सभी को अपना मानकर चलना। पूरा देश सबका है और यही सच्ची सामाजिक सद्भाव की भावना है।
भागवत ने सार्वजनिक सुविधाओं और धार्मिक स्थलों तक खुली पहुंच की वकालत करते हुए कहा कि ये सभी के लिए बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध होने चाहिए। उन्होंने ऐसे उपायों को संघर्ष का स्रोत नहीं बल्कि एकता का कार्य बताया और सार्वजनिक जीवन में समान अवसर के महत्व को रेखांकित किया।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते अपराधों का जिक्र करते हुए भगवत ने आत्मनिरीक्षण और रचनात्मक समाधानों का आह्वान किया। उन्होंने कहा, हम हिंदू हैं और जहां भी हमें कोई समस्या दिखती है, चाहे वह हमारे निजी जीवन से संबंधित हो या राष्ट्रीय। उस पर चर्चा करने से कभी कोई लाभ नहीं होता। हमें हमेशा समाधानों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, अगर हम स्थिर हैं तो कोई संकट हमें छू नहीं सकता। हिंदू समाज में ऐसी बुद्धि है। किसी भी हिंदू को अपने भीतर भेदभाव नहीं करना चाहिए।
