Madhumita Shukla Murder Case: 'अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी की रिहाई पर रोक लगा दी जाए। वरना मेरी हत्या हो गई तो कौन पैरवी करेगा?' दिवंगत कवयित्री मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से ये अपील की है। उन्होंने ये आशंका जाहिर की है कि अगर अमरमणि जेल से बाहर आता है तो उनकी जान को खतरा है, वो बहुत बड़ा मास्टरमाइंड है और कुछ भी कर सकता है।
मधुमिता की बहन निधि शुक्ला ने जताई खुद की हत्या की आशंका।
क्या बोलीं मधुमिता शुक्ला की बहन?
यूपी के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी की रिहाई पर दिवंगत कवयित्री मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला का कहना है, "मैं यूपी के राज्यपाल और यूपी के सीएम से उनकी रिहाई रोकने का अनुरोध करती हूं। आरटीआई आवेदनों में कहा गया है कि अमरमणि वास्तव में कभी जेल नहीं गए थे। वह कुछ भी कर सकता है। क्या होगा अगर उसने मेरी हत्या कर दी, तो इस मामले की पैरवी करने वाला कोई नहीं बचेगा? यूपी में किस तरह की कानून व्यवस्था है?"
अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी को मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है। उनकी रिहाई पर रोक लगाने से अदालत ने इंकार कर दिया है। दिवंगत कवयित्री मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। हालांकि अदालत ने समय पूर्व रिहाई पर प्रशासन को नोटिस जारी किया है।
अच्छे आचरण की वजह से मिल रही रिहाई
मधुमिका शुक्ला हत्याकांड में उत्तर प्रदश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी अपनी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी के साथ आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे, जो गोरखपुर की जेल में बंद हैं। नौ मई 2003 को कवयित्री मधुमिता शुक्ला का शव उनके लखनऊ स्थित आवास पर मिला था। बताया जा रहा है कि यूपी सरकार अच्छे आचरण की वजह से अमरमणि को रिहा कर रही है। राज्यपाल की इजाजत के बाद कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग ने अमरमणि एवं उनकी पत्नी की रिहाई का आदेश जारी कर दिया है।
लखनऊ में हुई थी मधुमिता शुक्ला की हत्या
आठ मई 2003 को दो हमलावरों ने लखनऊ स्थित मधुमिता शुक्ला के आवास पर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। बाद में मधुमिता की बहन निधि शुक्ला ने दावा किया कि मधुमिता, अमरमणि से करीबी रिश्ते में थी। उस समय अमरमणि मायावाती की अगुवाई वाली बसपा सरकार में मंत्री थे। अमरमणि पर आरोप लगने के बाद मायावती ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया और इसकी जांच सीबीआई के हवाले कर दी। बाद में जांच करते हुए सीबीआई ने अमरमणि, उनकी पत्नी एवं अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया।
