Sonam Wangchuk Health Update: शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को मेदांता हॉस्पिटल से वीडियो संदेश जारी किया। इस वीडियो में सोनम वांगचुक यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि मैं अभी जिंदा हूं। उनका यह वीडियो भूख हड़ताल के 25वें सामने आया। इस दौरान, उन्होंने सरकार से छात्रों पर कार्रवाई न करने की अपील की।
शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (फोटो साभार: @Wangchuk66)
वांगचुक का 11 KG वजन हो गया कम
वीडियो संदेश के मुताबिक, सोनम वांगचुक ने कहा, ''मैं अभी भी जिंदा हूं। आज मेरे अनशन का 25वां दिन है। इन 25 दिनों में मेरा लगभग 11 किलो वजन कम हो गया है और शरीर की काफी मांसपेशियां भी कम होने लगी हैं। इसके बावजूद मैं ठीक हूं। कल रात मुझे सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल लाया गया।''
इस दौरान, उन्होंने छात्रों की सराहना करते हुए कहा, ''मैं आप सभी को दाद देना चाहता हूं कि आपने इतनी शांति और संयम का परिचय दिया। खुद पर लाठियां खाते हुए भी आपने पलटकर कोई हमला नहीं किया। बहुत उकसाए जाने के बावजूद, यहां तक कि कुछ तत्वों को पत्थर फेंकने के लिए लाए जाने के बावजूद भी आपने धैर्य बनाए रखा। यह देखकर मेरा दिल पिघल गया, क्योंकि आप पर बेहद बर्बरता से हमले हो रहे थे। यही वजह थी कि मैंने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया था।''
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: मेदांता हॉस्पिटल के बाहर हाईवोल्टेज ड्रामा, वांगचुक से विपक्षी सांसदों को नहीं मिलने दे रही पुलिस; धरने पर बैठे संजय सिंह
'मैं भी तोड़ना चाहता हूं अनशन'
उन्होंने कहा कि अब भी मेरे पास कई नेता अनशन तुड़वाने के लिए आए हैं। इनमें सत्तारूढ़ दल के मंत्री, सांसद और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हैं। 65 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ वे यहां आकर मुझसे अपील कर रहे हैं कि मैं देशसेवा में फिर से लग जाऊं और अपना अनशन समाप्त कर दूं। मैं स्वयं भी ऐसा ही करना चाहता हूं।
वांगचुक ने रखी ये शर्त
उन्होंने आगे विनम्रता पूर्वक सरकार से अपील की कि बच्चों और छात्रों के खिलाफ इस तरह बल प्रयोग न किया जाए और दूसरा उन झूठे आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज न की जाए, ताकि उन्हें पुलिस या जेल के माध्यम से प्रताड़ित न किया जा सके। अगर मुझे सरकार की ओर से इन दोनों बातों का स्पष्ट आश्वासन जल्द मिल जाता है, तो मैं आप सभी और यहां आए सभी नेताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए आज ही अपना अनशन समाप्त कर दूंगा। लेकिन यदि ऐसा कोई आश्वासन नहीं मिलता है, तो दुर्भाग्यवश मुझे अपना यह अनशन जारी रखना पड़ेगा।
