समाजवादी पार्टी (सपा) के सीनियर नेता और विधायक आजम खां (Azam Khan) को हेट स्पीच (Hate Speech) देने के मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने दोषी करार देते हुए 3 साल जेल की सजा सुनाई और 25 हजार रुपए जुर्माना भरने को भी कहा। हालांकि उसके बाद उन्हें ऊपरी अदालत में अपील के लिए जमानत भी दे दी गई। सजा मिलने के बाद कोर्ट से बाहर निकलते वक्त मीडिया से बातचीत में आजम खां ने कहा कि यह अधिकतम सजा है। इस मामले में जमानत अनिवार्य शर्त है, उस आधार पर मुझे जमानत मिल गई है। मैं इंसाफ का कायल हो गया हूं।
सपा नेता आजम खान
आजम खान को जेल जाने की नौबत नहीं आएगी?
हेट स्पीच (Hate Speech) देने के मामले में रामपुर से समाजवादी पार्टी के विधायक आजम खां के खिलाफ दर्ज मुकदमे में रामपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में दोनों पक्षों में जमकर बहस हुई। यह बहस 21 अक्टूबर को पूरी हो गई थी। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर की तारीख तय की थी। कोर्ट ने इस दिन पहले दोषी करार दिया फिर तीन साल जेल की सजा सुनाई। फिर जमानत भी दे दी। गौर हो कि आजम खां को हेट स्पीच के मामले में सजा सुनाई गई है जो जमानती मामला है और यह संभव है कि उन्हें इस मामले में जेल जाने की नौबत ना आए।
आजम खां पर इन धाराओं के तहत दर्ज किए गए थे मामले
आजम खां (Azam Khan) के खिलाफ इंडियन पैनल कोड की धारा 153 क (धार्मिक भावनाएं भड़काना), 505 क (विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा या वैमनस्य की भावनाएं पैदा करना) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 (चुनाव के सिलसिले में विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य बढ़ाना) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
खत्म हो सकती है आजम खान की विधानसभा सदस्यता
अदालत के इस फैसले के चलते आजम खान की विधानसभा सदस्यता भी खत्म हो सकती है। गौर हो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जुलाई 2013 में जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक अगर सांसदों और विधायकों को किसी भी मामले में दो साल से ज्यादा की सजा होती है तो उनकी सदस्यता (संसद और विधानसभा से) समाप्त हो जाएगी।
इन मामलों पर आजम खान पर दर्ज हुआ था केस
आजम खां पर 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान मिलक कोतवाली इलाके के खातानगरिया गांव में जनसभा को संबोधित करने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और जिला प्रशासन के सीनियर अधिकारियों को भला-बुरा कहकर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। खां के इस बयान का वीडियो भी वायरल हुआ था। जिसका संज्ञान लेकर चुनाव आयोग ने लिया था।
