Humayun Kabir : तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक और बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखवाने वाले हुंमायू कबीर ने बड़ा बयान दिया है। कबीर ने कहा है कि यहां बनने वाली मस्जिद पुरानी बाबरी मस्जिद से ज्यादा बड़ी होगी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि मस्जिद की ऊंचाई 65 फीट से ज्यादा होगी। इसकी चौड़ाई भी पुरानी बाबरी मस्जिद से अधिक होगी। हुंमायू कबीर 22 दिसंबर यानी सोमवार को अपनी पार्टी का ऐलान करेंगे। इस दिन पार्टी के पदाधिकारियों की भी वह घोषणा करेंगे।
22 दिसंबर को अपनी पार्टी की घोषणा करेंगे हुंमायू कबीर। तस्वीर-PTI
रिपोर्टों के मुताबिक कबीर का कहना है कि बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए उन्हें देश-दुनिया भर से भारी चंदा मिल रहा है। नई पार्टी शुरू करने की घोषणा से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा चुके हुंमायू राज्य में अगल विधानसभा चुनाव असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के साथ मिलकर लड़ना चाहते हैं लेकिन ओवैसी ने अभी अपने पत्ते साफ नहीं किए हैं।
मुर्शिदाबाद-मालदा इलाकों में कबीर की अच्छी पकड़
हालांकि, बंगाल के एआईएमआईएम नेताओं का मानना है कि कबीर के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर उन्हें फायदा हो सकता है। एआईएमआईएम के नेताओं का मानना है कि मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में कबीर की अच्छी पकड़ है। ऐसे में साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर वोट शेयर में इजाफा होने के साथ-साथ कुछ सीटें भी निकल सकती हैं। हालांकि, कबीर के साथ राजनीतिक गठबंधन करना है या नहीं इस पर अंतिम फैसला ओवैसी करेंगे।
6 दिसंबर को बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखी
बता दें कि बेलडांगा में हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखी। बाबरी विध्वंस की 33वीं बरसी पर इस मस्जिद की आधारशिला रखी गई। कबीर ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंच पर मौलवियों के साथ फीता काटकर औपचारिकता पूरी की। मस्जिद निर्माण के लिए कबीर को भारी चंदा एकत्र हुआ। दावा किया गया कि शिलान्यास समारोह में 11 पेटी चंदा इकट्ठा हुआ, जिसे गिनने के लिए 30 लोग और नोट गिनने की मशीन लगानी पड़ी।
मामला कोर्ट तक पहुंचा
मस्जिद की नींव रखने का विवाद कोर्ट भी पहुंच गया है। प्रस्तावित बाबरी मस्जिद को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में एक और जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों से आवश्यक अनुमति के बिना ही बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किया गया। इसके लिए कोई सरकारी अनुमति नहीं है।
