फ्लैट का पजेशन मिलने के बाद भी मुआवजे की मांग कर सकते हैं खरीदार, पंजाब-हरियाणा HC का बड़ फैसला

न्यायाधीश जगमोहन बंसल ने अपने आदेश में कहा कि सेक्शन 18 (1) के तहत प्रोमोटर की जवाबदेही बनती है और इस जवाबदेही को कॉन्ट्रैक्चुअल टर्म अथवा बॉयर ने फ्लैट का पजेशन स्वीकार कर लिया है, इस आधार पर कम नहीं किया जा सकता।

Homebuyers News: फ्लैट खरीदारों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अपने एक अहम फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि फ्लैट मिलने में हुई देरी पर ब्याज पाने का कानूनी अधिकार केवल इसलिए समाप्त नहीं हो जाता कि खरीदार को फ्लैट का पजेशन मिल गया है। न्यायाधीश जगमोहन बंसल ने अपने आदेश में कहा कि सेक्शन 18 (1) के तहत प्रोमोटर की जवाबदेही बनती है और इस जवाबदेही को कॉन्ट्रैक्चुअल टर्म अथवा बॉयर ने फ्लैट का पजेशन स्वीकार कर लिया है, इस आधार पर कम नहीं किया जा सकता।

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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का अहम फैसला।

अदालत ने एक सीमा का सिद्धांत तय किया

हालांकि अदालत ने एक सीमा का सिद्धांत तय किया है। अदालत ने कहा कि RERA में ऐसी शिकायतें दाखिल करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं है, लेकिन खरीदार अनिश्चितकाल तक प्राधिकरण के पास शिकायत लेकर नहीं जा सकते। गुड़गांव ग्रीन्स, सेक्टर-102 के होमबायर्स से जुड़े मामलों में Emaar India की ओर से दायर 47 अपीलों पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि जहां घर का कब्जा और कन्वेयंस डीड दोनों हो चुके हैं, वहां कब्जा मिलने की तारीख से तीन साल शिकायत दाखिल करने के लिए सामान्यतः उचित अवधि मानी जाएगी। हालांकि, 15 मार्च 2020 से 28 फरवरी 2022 तक की कोविड अवधि को इस गणना से बाहर रखा जाएगा।

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