450 साल पहले शुरू हुई थी रामलीला, भारत ही नहीं दुनिया के इन देशों में भी लोकप्रिय

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  • Updated Sep 27, 2022, 04:13 PM IST

महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखी गई रामायण ,भगवान राम पर लिखा गया पहला महाकाव्य है। इसे संस्कृत में लिखा गया था। इसके बाद अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास ने सोलहवी शताब्दी में रामचरित मानस की रचना की। देश के विभिन्न इलाकों में रामलीला को कलाकार, अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत करते हैं।

KEY HIGHLIGHTS
  • मेघा भगत ने आज से करीब 450 साल पहले वाराणसी के रामनगर में पहली बार रामलीला का मंचन किया ।
  • मूक अभिनय से लेकर गायन और मंडलियों के जरिए रामलीला की प्रस्तुति की जाती है।
  • रामलीला का भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में मंचन किया जाता है।

History of Ramlila: शारदीय नवरात्र (Navratri) में देवी दुर्गा (Devi Durga) की पूजा के साथ-साथ रामलीला का भी महत्व है। और लोकप्रियता का आलम यह है कि रामलीला भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि रामलीला का आयोजन आज से करीब 450 साल पहले किया गया था और उसके बाद से यह देश और दुनिया में लोकप्रिय होती चली गई। और इसका कई रूपों में मंचन होता है। जिसमे मूक अभिनय से लेकर गायन और मंडलियों के जरिए रामलीला की प्रस्तुति की जाती है।

ramlila

रामलीला प्रस्तुत करते हुए कलाकाक

रामलीला का मंचन कब शुरू हुआ

महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखी गई रामायण (Ramayan),भगवान राम (Ram) पर लिखा गया पहला महाकाव्य है। इसे संस्कृत में लिखा गया था। इसके बाद अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास (Goswami Tulsidas) ने सोलहवी शताब्दी में रामचरित मानस (Ramcharit Manas) की रचना की। तुलसीदास द्वारा लिखी रामचनित मानस से भगवान राम की कहानी, जन-जन तक लोकप्रिय हो गई और ऐसा मान्यता है कि उनके शिष्य मेघा भगत ने पहली बार रामलीला का मंचन किया। अयोध्या शोध संस्थान के अनुसार रामचरित मानस की रचना प्ररम्भ करने के उपरान्त गोस्वामी तुलसीदास जी काशी गये और वही पर निवास करने लगें। और उनके शिष्य मेघा भगत ने आज से करीब 450 साल पहले वाराणसी के रामनगर (Ramnagar Ramlila) में पहली बार मंचन किया जो रामचरितमानस पर आधारित थी। कहा जाता है कि उस समय के काशी नरेश ने गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस को पूरा करने के बाद रामनगर में रामलीला कराने का संकल्प लिया था। तभी से देशभर में रामलीला का प्रचलन शुरू हुआ।

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