हिमाचल प्रदेश संकट: अभी खत्म नहीं हुआ सुक्खू सरकार का संकट, अयोग्य घोषित छह विधायक पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Mar 5, 2024, 10:00 PM IST

Himachal Pradesh Crisis: बागी कांग्रेस विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यपाल जैन ने दलील दी थी कि बागी विधायकों को केवल कारण बताओ नोटिस दिया गया था और नोटिस का जवाब देने के लिए अनिवार्य रूप से सात दिन का समय दिया जाता है, लेकिन उन्हें कोई समय नहीं दिया गया।

Himachal Pradesh Crisis News: हिमाचल प्रदेश में हाल के राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग के बाद अयोग्य घोषित किये गये छह कांग्रेस विधायकों ने अपनी अयोग्यता को मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। पूर्व विधायकों ने राज्य विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के 29 फरवरी के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है। राज्यसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हर्ष महाजन के पक्ष में मतदान करने वाले कांग्रेस के ये बागी विधायक बाद में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए बजट पर मतदान से अनुपस्थित रहे थे। सत्तारूढ़ कांग्रेस ने इसी आधार पर उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग की थी।

Sukhwinder Singh Sukhu

कांग्रेस के बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका

बागी विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग किये जाने के परिणामस्वरूप कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। अयोग्य ठहराए गए विधायकों में राजिंदर राणा, सुधीर शर्मा, इंदर दत्त लखनपाल, देविंदर कुमार भुट्टू, रवि ठाकुर और चैतन्य शर्मा शामिल हैं। उन्हें अयोग्य घोषित किये जाने के बाद सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 68 से घटकर 62 रह गई है, जबकि कांग्रेस विधायकों की संख्या 40 से घटकर 34 हो गई। बागी विधायकों ने अपनी याचिका में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उन्हें अयोग्यता याचिका पर जवाब देने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

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