Himachal Pradesh Assembly Election 2022: हिमाचल की रामपुर सीट पर हमेशा से चुनाव दिलचस्प रहा है, लेकिन इस बार बिना वीरभद्र सिंह (Virbhadra Singh) के चुनावी मैदान में उतरी कांग्रेस (Congress) के लिए कई चुनौतियां सामने हैं। इस सीट पर वीरभद्र सिंह की तूती बोलती थी। कहा जाता है कि कांग्रेस को इस सीट को जीतने के लिए सिर्फ एक दिन का प्रचार चाहिए होता है। वो एक दिन वीरभद्र सिंह इस क्षेत्र में आते और कांग्रेस उम्मीदवार यहां से चुनाव जीत जाते, लेकिन पिछले तीन बार से लगातार इस सीट से विधायक बनने वाले नंद लाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इस बार वीरभद्र सिंह उनके साथ नहीं हैं, उनके निधन के बाद से यह सीट जीतना काफी मुश्किल हो सकता है।
सोनिया गांधी के पूर्व कमांडो नंद लाल (फोटो- फेसबुक)
कौन हैं नंद लाल
नंद लाल की इस इलाके में पहचान सोनिया गांधी के कमांडो के तौर पर रही है। वो आटीबीपी में रह चुके हैं। यहीं से वो एसपीजी में गए थे। नंद लाल एशियाड (1982), गुटनिरपेक्ष बैठक, 1983 और राष्ट्रमंडल सम्मेलन, 1984 जैसे अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था में सक्रिय रूप से शामिल थे। पूर्व पीएम राजीव गांधी से लेकर चंद्रशेखर तक की सुरक्षा में तैनात रहे। सोनिया गांधी के साथ रहने के बाद उन्होंने वॉलंटरी रिटायरमेंट ले लिया और हिमाचल की राजनीति में उतर गए।
रामपुर सीट पर एंट्री
रामपुर रियासत के आखिरी राजा वीरभद्र सिंह थे। यहां आज भी उनका पैलेस है। यही कारण रहा है कि यह सीट कांग्रेस के लिए अपराजेय रही है। सीट रिजर्व होने की वजह से खुद वीरभद्र सिंह यहां से कभी चुनाव नहीं लड़े, लेकिन जीत उन्हीं के नाम पर मिलती रही है। नंद लाल जब यहां पहुंचे तब यहां से विधायक सिंघी राम थे, वीरभद्र के खास भी थे, लेकिन तब वीरभद्र के मन से ये उतर चुके थे। आलाकमान के निर्देश पर 2007 में वीरभद्र सिंह ने यहां से नंद लाल का उतार दिया। नंद लाल यहां से जीत भी गए। इसके बाद वो यहां से लगातार जीतते रहे हैं।
इस बार का हाल
रामपुर सीट से इस बार भी अपनी जीत को लेकर नंद लाल आशान्वित हैं, लेकिन वीरभद्र सिंह के निधन के बाद से चुनौतियां बढ़ी हुईं हैं। साथ ही वीरभद्र सिंह के न रहने से वो कांग्रेसी भी बागी हो गए हैं, जो उनके सामने चुप रहते थे। कांग्रेस के पूर्व विधायक सिंघी राम भी चुनावी मैदान में हैं। उधर बीजेपी ने भी उम्मीदवार बदलकर युवा चेहरा कौल नेगी पर भरोसा जताया है। हालांकि यहां वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह और बेटे विक्रमादित्य सिंह चुनाव प्रचार कर चुके हैं।
