श्रीनगर का नक्शबंद साहिब कब्रिस्तान बना छावनी, आसपास किलेनुमा सुरक्षा व्यवस्था, 1931 की घटना से जुड़ा मामला

शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है जिसमें वह सुबह 4:30 बजे शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए कब्रिस्तान पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनका दावा है कि सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया।

Heavy Security Cover Around Naqshband Sahib: उपराज्यपाल प्रशासन ने सोमवार को श्रीनगर के कई इलाकों में प्रतिबंध लगा दिए ताकि लोग शहर के नक्शबंद साहिब इलाके में स्थित शहीदों के कब्रिस्तान पर इकट्ठा न हो सकें। अधिकारियों ने बताया कि रविवार को कब्रिस्तान के एक किलोमीटर के दायरे को सील कर दिया गया था, वहीं पुराने शहर और सिविल लाइंस इलाके के कुछ हिस्सों में एहतियाती तौर पर बैरिकेड्स लगाए गए थे।

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नक्शबंदी साहिब के बाहर सख्त सुरक्षा (फाइल फोटो)

1931 की गोलीबारी की घटना से जुड़ा मामला

उन्होंने आगे बताया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों को भारी संख्या में तैनात किया गया है। स्थानीय लोग 13 जुलाई को महाराजा हरि सिंह के सैनिकों की 1931 की गोलीबारी में शहीद हुए प्रदर्शनकारियों की याद में मनाते हैं। 13 जुलाई, 1931 को श्रीनगर की केंद्रीय जेल के बाहर डोगरा सेना ने गोलीबारी की थी जिसमें 22 लोगों की जान चली गई थी। 2020 में उपराज्यपाल के नेतृत्व वाली सरकार ने इस दिन को राजपत्रित छुट्टियों की सूची से हटा दिया। नेताओं के आज कब्रिस्तान तक जाने वाले मार्च को रोकने के लिए नौहट्टा के पास कंटीले तारों, प्लास्टिक बैरिकेड्स, जीआई शीट और खंभों की घेराबंदी की गई है।

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