Terrorist Attack in Gujarat: यह 24 सितंबर 2002 की बात है, जब भारत ने भयानक दृश्य देखा था, जब आतंकवादियों ने गुजरात के गांधीनगर में अक्षरधाम मंदिर पर हमला कर दिया था। इस हमले में 33 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 80 अन्य लोग घायल हो गए थे।
गुजरात में आज ही के दिन हुआ था आतंकी हमला (Photo-X)
आतंकियों ने अक्षरधाम मंदिर पर गोलीबारी की
गुजरात के गांधीनगर में स्थित भारत के सबसे शांत मंदिरों में से एक अक्षरधाम मंदिर पर 2002 में इसी दिन दो हथियारबंद आतंकवादियों ने हमला कर दिया था।
ऑटोमैटिक हथियार और ग्रेनेड से लैस हमलावरों ने मंदिर परिसर में मौजूद भक्तों और कर्मचारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। लोग बचने के लिए इधर-उधर भागने लगे और भगदड़ मच गई। जब गोलीबारी रुकी तो 33 लोगों की जान जा चुकी थी और 80 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इस घटना से पूरा देश सदमे में आ गया था।
NSG ने संभाला था मोर्चा
यह भयानक हमला 24 सितंबर 2002 को लगभग 4:45 PM पर शुरू हुआ और 25 सितंबर 2002 की सुबह तक चलता रहा।
सुरक्षा बलों ने तुरंत कार्रवाई की और स्थिति को संभालने के लिए दिल्ली से नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के कमांडो को भेजा गया। बताया जाता है कि तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुरोध पर दिल्ली से विशेष रूप से ब्लैक कैट कमांडो बुलाए गए थे। आतंकवादियों को खत्म करने का ऑपरेशन लगभग 12 घंटे तक चला। लंबी गोलीबारी के बाद दोनों हमलावर मारे गए और घेराबंदी खत्म हो गई।
पाकिस्तान से जुड़े तार
बाद में जांच में पता चला कि हमलावर पाकिस्तान के एक चरमपंथी संगठन से थे, जिनका मकसद गुजरात में सांप्रदायिक तनाव भड़काना और शांति भंग करना था। उस समय राज्य गोधरा दंगों में हुई हिंसा से उबर रहा था। इस हमले की विदेशों में भी भारी निंदा हुई थी और नेताओं ने आतंकवाद का सामना करने के लिए एकता और दृढ़ता की जरूरत पर जोर दिया था।
इसके बाद इस कायराना हमले के साजिशकर्ताओं को सजा दिलाने की कोशिशें शुरू हुईं। गुजरात पुलिस ने बाद में इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया। एक विशेष अदालत ने इन छह आरोपियों को हमले में शामिल होने का दोषी पाया। इनमें से तीन को मौत की सजा सुनाई गई, जबकि बाकी तीन को अलग-अलग समय के लिए जेल की सजा दी गई।
जम्मू-कश्मीर से मुख्य आरोपी हुआ था गिरफ्तार
गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने जम्मू-कश्मीर से 2002 के अक्षरधाम मंदिर हमले के मुख्य आरोपी मोहम्मद यासीन बट को 2019 में गिरफ्तार किया था। आतंकवादियों की पहचान अशरफ अली मोहम्मद फारूक और मुर्तजा हाफिज यासीन के रूप में हुई थी।
तब बताया गया था कि आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य मोहम्मद यासीन बट मंदिर पर हमले के बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भाग गया था। हालांकि, फिर बाद में बट कश्मीर लौट आया था और अनंतनाग में एक लकड़ी के गोदाम में काम कर रहा था। तब उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।
हमले के बाद गुजरात और केंद्र सरकार ने देश भर में धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। अक्षरधाम मंदिर परिसर को फिर से बनाया गया और जनता के लिए खोला गया।
