मिडिल ईस्ट में जारी जंग के हालातों के बीच भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को तेज करते हुए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए भारत ने ₹858 करोड़ के दो महत्वपूर्ण रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये करार रूस और अमेरिका की सहयोगी कंपनियों के साथ साइन किए गए हैं, और इन्हें भारत की मल्टी-थियेटर सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से अत्यंत अहम माना जा रहा है। समझौतों के तहत भारत रूस की कंपनी Rosoboronexport से आधुनिक टंगुस्का (Tunguska) एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदेगा, जो भारतीय सेना की मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड को और मजबूत करेगा। वहीं दूसरा बड़ा अनुबंध Boeing India Defence Private Ltd के साथ किया गया है, जिसके तहत भारतीय नौसेना के P-8I लॉन्ग-रेंज मैरीटाइम रिकॉनिसेंस (LRMR) एयरक्राफ्ट की मेंटेनेंस और डिपो-लेवल सर्विसिंग अब भारत में ही होगी। दोनों सौदों को भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और क्षेत्रीय तैयारियों के लिहाज से निर्णायक माना जा रहा है।
भारत ने किए बड़े रक्षा समझौते।
रूस से भारत खरीदेगा टंगुस्का मिसाइल सिस्टम
पहला करार ₹445 करोड़ का रूस की सरकारी कंपनी JSC Rosoboronexport के साथ किया गया है, जिसके तहत भारतीय सेना को टंगुस्का (Tunguska) एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मिलेंगे। ये मिसाइलें भारत की मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड को मजबूत करेंगी और विमानों, ड्रोन और क्रूज़ मिसाइल जैसे खतरों से निपटने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। वैश्विक स्तर पर बढ़ते मिसाइल हमलों, ड्रोन युद्ध और हवाई खतरों के मद्देनजर भारत भी अपनी वायु रक्षा परत को अपग्रेड करने पर तेजी से काम कर रहा है।P-8I MRO करार
दूसरा समझौता ₹413 करोड़ का Boeing India Defence Private Limited के साथ किया गया। इसके तहत भारतीय नौसेना के P-8I लॉन्ग-रेंज मैरीटाइम रिकॉनिसेंस (LRMR) एयरक्राफ्ट की डेपो-लेवल मेंटेनेंस अब भारत में ही होगी। P-8I वर्तमान समय में हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों, पनडुब्बियों की तैनाती, पाकिस्तान की समुद्री निगरानी क्षमताओं और पश्चिमी समुद्री मार्गों में अस्थिरता से निपटने का भारत का सबसे विश्वसनीय प्लेटफॉर्म है। नौसेना वर्तमान में 12 P-8I संचालित करती है, और इन विमानों की सर्विसिंग घरेलू MRO सुविधा में होने से समय और लागत दोनों कम होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह समय अत्यधिक संवेदनशील है एक ओर जहां उत्तरी सीमाओं पर चीन का दबाव है, वहीं दूसरी ओर हिंद महासागर में उसकी बढ़ती गतिविधियां चिंता का विषय है। वहीं, पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच तनाल और मध्य पूर्व में जंग और अस्थिरता भी नई चुनौती बनकर उभर रही है। ऐसे में 858 करोड़ रुपये के ये दोनों रक्षा सौदे न केवल तकनीक रूप से भारत को मजबूत करेंगे बल्कि यह संकेत भी देते हैं कि भारत क्षेत्रीय अस्थिरताओं को देखते हुए अपनी सुरक्षा क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है।
