Ghosi By-Polls Results 2023: घोसी विधानसभा उप-चुनाव के नतीजे ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए खतरे की बड़ी घंटी बजा दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि उत्तर प्रदेश (यूपी) की इस सीट के बाई-पोल में समाजवादी पार्टी (सपा) की जीत हुई है। ऐसा होने के पीछे कई वजहें हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बड़े अहम अस्त्र का सफल होना भी शामिल है। यह उनका पीडीए फॉर्म्यूला है, जिसके तहत सपा ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) वोटबैंक को जमकर साधा।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)
घोसी उप-चुनाव परिणाम से जुड़ी बड़ी बातें
- 2022 में सपा जीती थी, इस लिहाज से यह सीट बचाने में सफल रही
- यह बाई-पोल एनडीए और इंडिया के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई से कम नहीं था
- अखिलेश का पीडीए फॉर्म्यूला इस उप-चुनाव में सही से काम कर गया
- बीजेपी ने अपना पूरा दम झोंक दिया था, पर पीडीए अस्त्र के आगे ढेर हुई
- सपा प्रमुख ने कहा- यह बीजेपी की सियासी ही नहीं बल्कि नैतिक मात भी है
- योगी मैजिक के साथ भूपेंद्र चौधरी की रणनीति भी खासा काम नहीं कर सकी
- भाजपा के लिए स्थानीय नेताओं की नाराजगीइस उपचुनाव में भारी पड़ी
- रोचक बात है कि सवर्ण उम्मीदवार भी समाजवादी पार्टी के पक्ष में चला गया
- भूमिहार वोट की लड़ाई में योगी सरकार में बिजली मंत्री एके शर्मा फिसड्डी निकले
- इस सियासी क्षेत्र में एनडीए पर सपा का समीकरण भारी पड़ता नजर आया
हालांकि, उपचुनाव के नतीजे का भाजपा सरकार पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा, जिसे 403 सदस्यीय राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल है। मगर इसका परिणाम 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से एक संकेत हो सकता है। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं।
कुल 33 दौर की गिनती के बाद सिंह ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और बीजेपी कैंडिडेट दारा सिंह चौहान पर 42,759 मतों के अंतर से जीत हिसाल की। सूबे के मऊ जिले में घोसी सीट पर उप-चुनाव में वोटों की गिनती शुक्रवार सुबह शुरू हुई थी, जिसे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के बीच पहला बड़ा चुनावी मुकाबला माना गया।
घोसी में मंगलवार (पांच सितंबर) को मतदान हुआ था, जहां 50.77 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। यह विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के गठन के बाद राज्य में पहला चुनावी मुकाबला था। सपा के टिकट पर 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में यह सीट जीतने वाले दारा सिंह चौहान के जुलाई में इस्तीफे के बाद इस सीट पर उपचुनाव जरूरी हो गया था, जबकि सपा से इस्तीफा देकर चौहान फिर भाजपा में लौट आए थे। भाजपा ने उन्हें उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन सपा ने उनके मुकाबले सुधाकर सिंह को मैदान में उतारा था।
हालिया उप-चुनाव में चौहान को राजग के सहयोगियों...अपना दल (सोनेलाल), निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) पार्टी और पूर्व सपा सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) का समर्थन मिला।
वहीं, दूसरी ओर सपा उम्मीदवार सुधाकर सिंह को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दलों - कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (भाकपा-माले)-लिबरेशन और सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी का समर्थन मिला।
