G20 Summit Kashmir: जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद घाटी के हालात काफी तेजी से बदले हैं। धीरे-धीरे वहां अमन-चैन बहाल हो रहा है। हालांकि, बीच-बीच में आतंकी घटनाएं सरकार के लिए एक चुनौती जरूर बनी हुई हैं, जिसके चलते बीते दिनों जम्मू-कश्मीर से चरणबद्ध तरीके से सशस्त्र बलों की वापसी का फैसला रद्द कर दिया गया था। इस बीच भारत सरकार ने घाटी को अशांत बनाने की कोशिश में जुटे आतंकियों को खुली चुनौती दे डाली है। दरअसल, सरकार की ओर से आज (सोमवार) श्रीनगर में जी-20 पर्यटन कार्यसमूह की बैठक का आयोजन किया जा रहा है।
डल झील पर पेट्रोलिंग करते सीआरपीएफ कमांडोज
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धारा 370 हटने के बाद घाटी में यह इस तरह का यह पहला आयोजन है। यह तीन दिवसीय बैठक डल झील के किनारे शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की जाएगी, जिसमें जी-20 देशों के 60 से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। आतंकी चुनौतियों और तमाम विकट परिस्थितियों के बीच इस बैठक के लिए भारत सरकार ने श्रीनगर को चुना है, ऐसे में दुनिया के तमाम देशों की नजरें इस समय भारत की ओर है। भारत सरकार ने भी इस बैठक के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए सबसे खतरनाक मार्कोस और एनएसजी के कमांडोज को उतारा गया है। ऐसे में इनकी निगेहबानी में होने जा रही बैठक में परिंदे का भी पर मार पाना काफी मुश्किल है।
तीन लेयर में होगी डेलिगेट्स की सुरक्षा
श्रीनगर की डल झील के किनारे होने जा रही इस बैठक के लिए देश के सबसे खतरनाकर मार्कोस कमांडोज को उतारा गया है। जानकारी के मुताबिक, इन कमांडोज को डल झील पर तैनात किया गया है, जिससे इस झील के सहारे किसी भी हमले को नेस्तनाबूत किया जा सके। इसके अलावा आसमानी सुरक्षा का जिम्मा नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड (NSG) को सौंपा गया है। आसमान में ड्रोन के जरिए भारत के सबसे भरोसेमंद कमांडोज आसमान से निगेहबानी करेंगे। इसके अलावा इन कमांडोज को लाल चौक की सुरक्षा का जिम्मा भी सौंपा गया है। इसके अलावा तीसरा घेरा जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) का होगा, जिन्हें किसी भी हमले के समय कवर सुरक्षा देने के लिए तैनात किया गया है।
यातायात पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं
भारत सरकार की ओर से सुरक्षा के इंतजाम इतने पुख्ता किए गए हैं कि किसी भी परिंदे का पर भी मार पाना काफी मुश्किल है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक,प्रतिनिधियों का स्वागत करने के लिए सड़कों और दीवारों को सजाया गया है। इसके अलावा किसी भी तरह के पब्लिक मूवमेंट या दुकानों को भी बंद नहीं किया गया है, जिससे घाटी में सुरक्षा की भावना को बढ़ाया जा सके।
