भारतीय सेना के पूर्व ब्रिगेडियर सुरिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता 1971 के युद्ध में फ्रंटलाइन ऑफिसर रह चुके हैं, 1998-99 में युद्ध के दौरान कारगिल ब्रिगेड की कमान संभाली थी और दो बार युद्ध में घायल हुए। उन्हें सेना मेडल (गैलेंट्री), विशिष्ट सेवा मेडल और आर्मी चीफ कमेंडेशन से सम्मानित किया गया है।
कारगिल युद्ध के सही इतिहास सामने लाने की मांग (फाइल फोटो)
ब्रिगेडियर सुरेन्द्र सिंह की याचिका में मांग की गई है कि
*सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे कि कारगिल युद्ध 1998-99 का वास्तविक और पूर्ण इतिहास तैयार किया जाए।
*इसके लिए या तो कारगिल रिव्यू कमेटी की एक ऐडेंडम कमेटी बनाई जाए या एक नई स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के जज करें।
*इस प्रक्रिया में जनता की राय और युद्ध के समय तैनात सैनिकों व अधिकारियों की गवाही को भी शामिल किया जाए।
*भविष्य में कारगिल जैसी बड़ी घुसपैठ और युद्ध की स्थिति से बचाव के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही युद्ध को लेकर ऐसी रणनीति अपनाई जाए जिससे जानमाल को ज्यादा नुकसान न हो।
याचिका में आधार क्या है?
* याचिकाकर्ता के अनुसार कारगिल युद्ध से पहले और युद्ध के दौरान कई सैन्य चूकें हुईं, जैसे सुरक्षा से जुड़ी चूक, समय रहते चेतावनियों की अनदेखी और गलत नियुक्तियां।
*पूर्व ब्रिगेडियर ने कहा कि कई बार दुश्मन की घुसपैठ की चेतावनी दी गई थी, लेकिन उच्च अधिकारियों ने उसे अनसुना कर दिया गया
*आरोप लगाया गया कि युद्ध के बाद अधिकारियों ने तथ्य छिपाकर और झूठा नैरेटिव बनाकर रिपोर्टें पेश कीं और 'इंटेलिजेंस फेल्योर' की आड़ ली
* याचिकाकर्ता ने कहा कि Kargil Review Committee को सभी जरूरी तथ्यों की जानकारी नहीं दी गई थी और रिपोर्ट अभी भी अधूरी है।
*उन्होंने रक्षा मंत्रालय की 21 जून 2021 की वॉर हिस्ट्री पॉलिसी का हवाला देते हुए कहा कि इसमें पारदर्शी तरीके से इतिहास लेखन का दावा किया गया था लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ।
इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई कर सकता है। याचिकाकर्ता रिटायर्ड ब्रिगेडियर सुरिंदर सिंह की तरह ये याचिका सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड नमित सक्सेना की तरफ से दाखिल की गई है।
