Nandita Garlosa Joins Congress: असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता नंदिता गरलोसा (Nandita Garlosa) ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है।
बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुईं नंदिता गरलोसा।
रिपोर्ट के मुताबिक, गरलोसा ने बीजेपी द्वारा टिकट नहीं दिए जाने के बाद यह कदम उठाया। वह हाफलोंग सीट से मौजूदा विधायक हैं और क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखती हैं। जानकारी के मुताबिक, अब वह कांग्रेस के टिकट पर अपनी मौजूदा सीट हाफलोंग (Haflong) से चुनाव लड़ेंगी। गरलोसा असम सरकार में खेल और युवा कल्याण मंत्री थीं।
टिकट कटने से नाराजगी
बीजेपी ने इस बार हाफलोंग सीट से उनका टिकट काटकर नए चेहरे को मौका दिया है। माना जा रहा है कि एंटी-इंकम्बेंसी से बचने के लिए पार्टी ने यह फैसला लिया। इसी के बाद गरलोसा ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।
कांग्रेस में एंट्री से बदला समीकरण
कांग्रेस ने पहले इस सीट से निर्मल लांगथासा को उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन गरलोसा के शामिल होने के बाद पार्टी अब आखिरी समय में उम्मीदवार बदलने पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, गरलोसा की क्षेत्र में पकड़ और संगठनात्मक नेटवर्क को देखते हुए कांग्रेस उन्हें हाफलोंग से मैदान में उतार सकती है।
कौन हैं निर्मल लांगथासा?
नंदिता गरलोसा का जन्म 13 मई 1977 को असम के दीमा हसाओ जिले के हाफलोंग में हुआ था। उनके पिता का नाम नोनी गोपाल गोरलोसा है, जबकि उनकी मां के बारे में सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनका निवास हाफलोंग के कॉन्वेंट रोड इलाके में बताया जाता है।
राजनीतिक सफर की बात करें तो नंदिता गरलोसा ने 2021 में हाफलोंग (एसटी) विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर इतिहास रचा। उन्होंने करीब 18,295 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की और दीमा हसाओ जिले की पहली महिला विधायक बनीं। वह गुवाहाटी विश्वविद्यालय से जूलॉजी में एमएससी कर चुकी हैं।
विधायक बनने से पहले वह भारतीय जनता पार्टी के महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष रह चुकी हैं और नॉर्थ कछार हिल्स स्वायत्त परिषद में कार्यकारी सदस्य के रूप में भी काम कर चुकी हैं। साल 2022 में उन्हें Himanta Biswa Sarma सरकार में मंत्री बनाया गया, जहां उन्होंने बिजली, सहकारिता, खान एवं खनिज, स्वदेशी और जनजातीय धर्म एवं संस्कृति जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
वह 2021 से लगातार हाफलोंग विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और राज्य की सक्रिय महिला नेताओं में गिनी जाती हैं।
चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज
नामांकन की अंतिम तारीख से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने हाफलोंग सीट पर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। बता दें कि असम में 9 अप्रैल को एक चरण में चुनाव होना है। वहीं, मतो की गिनती 4 मई को होगी।
