पश्चिम एशिया में जारी जंग का असर लगातार देखने को मिल रहा है। अब खबर है कि कल, यानी एक अप्रैल से फ्लाइट का किराया बढ़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल में जेट फ्यूल यानी एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है, क्योंकि तेल विपणन कंपनियां मार्च में कीमतों को स्थिर रखने के बाद अब दरें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। बढ़ती लागत के दबाव को देखते हुए देश की प्रमुख एयरलाइंस कंपनियां-Air India, Air India Express, IndiGo, SpiceJet और Akasa Air- पहले ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लागू कर चुकी हैं। यह कदम बढ़ते ईंधन खर्च की भरपाई के लिए उठाया गया था।
1 अप्रैल से महंगा हो सकता है हवाई सफर
जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल
पिछले एक महीने में वैश्विक स्तर पर जेट फ्यूल की कीमतों में भारी वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, 20 फरवरी को जेट फ्यूल की कीमत करीब 95.9 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 20 मार्च तक बढ़कर 197 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। यानी सिर्फ चार सप्ताह में कीमतों में लगभग 105 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस तेज उछाल का सीधा असर एयरलाइंस की संचालन लागत पर पड़ रहा है। कंपनियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि अगर ईंधन महंगा होता रहा, तो टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी करना मजबूरी बन सकता है।
सरकार की क्या है तैयारी?
हाल ही में नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, "एटीएफ की कीमतें हर महीने की पहली तारीख को तय होती हैं। इसका असर 1 अप्रैल से दिखाई दे सकता है। हम सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करना चाहते हैं, खासकर मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में भी।" सुरक्षित संचालन का भरोसा दिलाते हुए उन्होंने आगे कहा, "इसका असर संचालन या यात्रियों पर नहीं पड़ना चाहिए। यही मंत्रालय की मंशा है और हम सकारात्मक तरीके से इस पर काम करेंगे।" राम मोहन नायडू ने संकेत दिया कि सरकार को एयरलाइंस कंपनियों पर बढ़ रहे वित्तीय दबाव का पूरा अंदाजा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य फोकस उड़ानों को सुरक्षित और सुचारु रूप से जारी रखना है, ताकि किसी भी फैसले का सीधा असर यात्रियों की जेब पर तुरंत न पड़े।
मुफ्त मनपसंद सीट से भी महंगा हो सकता है किराया
डीजीसीए के नए नियम के तहत 20 अप्रैल से विमानन कंपनियों को कम से कम 60% सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के देनी होंगी। अभी तक एयरलाइंस सीट चयन के लिए 200 से 2,100 रुपये तक अलग से शुल्क लेकर अतिरिक्त कमाई करती थीं। जब यह आय कम हो जाएगी, तो कंपनियां अपने नुकसान की भरपाई के लिए बेस किराया बढ़ा सकती हैं। इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है और कहा है कि इससे उन्हें अपने हानि हुए राजस्व की भरपाई के लिए हवाई किराया बढ़ाना पड़ सकता है।
