'RTI अर्जी दायर करना नया धंधा बन गया है'; सुप्रीम कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी; आरोपी को अग्रिम जमानत से भी किया इनकार

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि आरटीआई अर्जी दायर करना एक नया धंधा बन गया है। सड़क निर्माण कार्य की निगरानी और देखरेख सरकार तथा संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है। इसमें आरटीआई कार्यकर्ता की कोई भूमिका नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क निर्माण कार्य में कथित रूप से बाधा डालने और सरकारी कर्मचारी के कर्तव्य निर्वहन में हस्तक्षेप करने के आरोपी एक आरटीआई कार्यकर्ता को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, सुनवाई के दौरान अदालत ने आरटीआई कानून के दुरुपयोग पर भी कड़ी टिप्पणी की। न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने आरटीआई कार्यकर्ता राकेश कुमार बहल और उनके सहयोगी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरटीआई आवेदन दाखिल करना अब कुछ लोगों के लिए “नया धंधा” बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट

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सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि आरटीआई अर्जी दायर करना एक नया धंधा बन गया है। सड़क निर्माण कार्य की निगरानी और देखरेख सरकार तथा संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है। इसमें आपकी कोई भूमिका नहीं है। तथाकथित आरटीआई एक्टिविस्ट... याचिका खारिज की जाती है। न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई ने भी इस टिप्पणी से सहमति जताते हुए सवाल किया कि सड़क निर्माण कार्यों की निगरानी करने का अधिकार आखिर उन्हें किसने दिया है। उन्होंने कहा, “आप कौन होते हैं इन सभी सड़कों के निर्माण की निगरानी करने वाले? क्या आप कोई उच्च अधिकारी हैं?”

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