Farmers Protest: पंजाब-हरियाणा सीमा पर हरियाणा पुलिस के साथ झड़प के दौरान एक युवा किसान की मौत के बाद नया घमासान छिड़ गया है। किसान संगठनों ने आज 23 फरवरी को देशव्यापी 'ब्लैक फ्राइडे' विरोध का आह्वान किया है। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने 'दिल्ली चलो' मार्च को अपना समर्थन दिया है। दिल्ली चलो मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने शंभू बॉर्डर पर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों से उसकी झड़प भी हुई। इसी दौरान एक प्रदर्शनकारी और दो पुलिसकर्मियों की मौत भी हुई। वहीं, आज पंजाब के सीएम भगवंत मान ने मारे गए प्रदर्शनकारी के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया।
किसानों का आज ब्लैक फ्राइडे
प्रदर्शनकारी की मौत से दिल्ली चलो मार्च रुका
खनौरी बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसान की मौत के बाद किसान संगठनों का 'दिल्ली चलो' मार्च दो दिनों तक रुका हुआ है। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि वे शुक्रवार शाम को अगली कार्रवाई तय करेंगे। साथ ही उन्होंने पंजाब पुलिस से प्रदर्शनकारी की मौत का मामला दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है।
सीएम खट्टर और गृह मंत्री अमित शाह को ठहराया जिम्मेदार
एसकेएम ने विरोध प्रदर्शन के बीच 21 वर्षीय शुभकरण सिंह की मौत के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। नेताओं ने मृतक किसान के परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश द्वारा घटना की न्यायिक जांच की मांग की है। एसकेएम ने पूरे भारत में आज 'काला दिवस' मनाने की घोषणा की है।
26 फरवरी को राजमार्गों पर ट्रैक्टर मार्च
एसकेएम ने कहा है कि विरोध के प्रतीक के रूप में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर और गृह मंत्री विज के पुतले जलाए जाएंगे। खट्टर और विज दोनों को अपने पदों से इस्तीफा देने की भी मांग की गई है। एकजुटता और ताकत दिखाने के लिए किसान संगठन 26 फरवरी को राजमार्गों पर ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे। वहीं, अखिल भारतीय किसान मजदूर महापंचायत 14 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली है, जिसका लक्ष्य देश भर के किसानों को एकजुट करना है। हालांकि सीधे तौर पर 'दिल्ली चलो' आंदोलन का हिस्सा नहीं होने के बावजूद एसकेएम ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया है।
दो पुलिसकर्मियों की भी मौत
वहीं, किसानों और पुलिस के बीच झड़पों में दो पुलिसकर्मियों अधिकारियों के मारे जाने और 30 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। हरियाणा पुलिस ने कहा कि किसान नेताओं के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए), 1980 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। कानून व्यवस्था बनाए रखने और गड़बड़ी को रोकने के लिए किसान नेताओं को हिरासत में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
